
Big cheat with farmers, 60 Bt cotton wasted in bhilwara
भीलवाड़ा
कोरोना संक्रमण के बीच किसानों को परेशान करने वाली एक और खबर आई है। जिले में बीटी कपास फसल की बुवाई कर किसानों को कमाई की आस जगी लेकिन यह 60 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। जिले के कई किसानों ने कृषि विभाग ने शिकायत दी है। इस पर कृषि विभाग की टीम ने जगह-जगह जायजा लिया। किसानों ने बताया कि जिसने भी अजीत बीज का कपास की बुवाई की है उसका पौधा सूख गया है। इससे उत्पादन नहीं हो रहा है। हालात यह है कि लॉकडाउन के बाद किसानों की आखिरी उम्मीद यही थी कि इससे परिवार के पालन-पोषण में दिक्कत नहीं आएगी। वहीं अब उत्पादन नहीं होने से किसानों को निराशा हाथ लगी है। जिले के मांडल, बागोर, सहाड़ा, आसीन्द, रायपुर तथा करेड़ा क्षेत्र के किसानों ने अपनी कपास की फसल को बर्बाद होता देख इसकी शिकायत कृषि विभाग से भी की है।
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यह कह रहे हैं किसान
जिले के किसानों का कहना है कि उन्होंने बीटी कपास की बुवाई के लिए अजीत कम्पनी के बीज की किस्मे एसीएच 33-2 बीजी-2, एसीएच 133 बीजी-2 तथा एसीएच 155 के बीज से समय पर बुवाई की। लेकिन फसल खराब हो गई है। फसल की बढवार कमजोर हो गई। फसल में अंगमारी रोग से पत्तीयां एवं बॉल काले पडकर सुख गए है। बॉल समय से पहले परिपक्क होकर कमजोर हो गए है। कपास की फसल में फफूंद रोग, अल्टरमेरिया पत्ती धब्बा रोग व रसचूसक कीड़ो का प्रकोप हो गया है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में करीब 36 हजार 869 हैक्टेयर में बीटी व देशी कपास की बुवाई की गई है। इनमें से 90 प्रतिशत खेतों अजीत बीज की बुवाई हुई है।
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इन किसानों ने की शिकायत
- आमली का खेड़ा निवासी भंवरलाल जाट ने तीन बीघा जमीन में अजीत कपास की बुवाई की। वह सफल पकने से पहले ही खराब हो गई।
- मांडल के लक्ष्मीपुरा निवासी मोहनलाल चौधरी ने 20 बीघा खेती में बीटी कपास की बुवाई के लिए गंगापुर से बीज खरीदा। अब फसल पूरी तरह से सुख गई है।
- मांडल के लक्ष्मीपुरा निवासी उदयराम ने 5 बीघा खेती में बीटी कपास की बुवाई की। बॉल सुखकर काले पड़ गए। पत्तिया खराब हो गई है।
- आसीन्द के ब्राह्मणों की सरेरी निवासी कमला देवी पत्नी सिताराम माणमिया ने 5 बीघा खेती में अजीत बीज की बुवाई की, लेकिन फसल पूरी तरह से खराब हो गई है।
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छह सदस्यों की बनाई कमेटी
कृषि विभाग को शिकायत मिलने पर छह अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया। कमेटी ने जिले के कई गांवों का दौरा कर कपास की फसल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने माना की फसल खराब हो चुकी है। अजीत कम्पनी का बीज खराब होने से ऐसा हुआ है। जांच टीम में सहायक आचार्य (शस्य) डॉ. रामावतार खण्डेलवाल, पौध वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार छाता, सहायक निदेशक पौध संरक्षण डॉ. शंकरसिंह राठौड़, सहायक निदेशक गुलाबपुरा उषा चितारा, कृषि अधिकारी पौध संरक्षण दिलिप सिंह तथा कृषि अधिकारी डॉ. श्रीपाल चौधरी शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि जो बीज किसानों ने बोया है वह किस्म कीट एवं रोगो के प्रति प्रतिरोधक नहीं है। इससे उत्पादन कम होगा तथा आर्थिक नुकसान होगा। एक अधिकारी ने बताया कि जो किस्म किसान बता रहे है वह किस्म का बीज खराब होने से यह स्थिति सामने आई है। इन अधिकारियों के साथ अजीत कम्पनी के स्थानीय अधिकारी पूरण शर्मा व उच्च अधिकारियों ने भी निरीक्षण किया।
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कम्पनी को थमाया नोटिस
अजीत कम्पनी के बीज सही नहीं होने से किसानों की फसले खराब हो रही है। हालांकि इसका आंकलन जिले में किया जा रहा है। बीज में खराबी को लेकर कम्पनी को नोटिस जारी किया है।
रामपाल खटीक, उपनिदेशक कृषि विभाग
Published on:
13 Sept 2020 08:51 pm
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