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मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी कैंसर व ब्लैक फंगस की बायोप्सी जांच

मरीजों के इलाज में अब नहीं होगी देरी , पैथोलॉजी लैब में यह जांच शुरू

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मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी कैंसर व ब्लैक फंगस की बायोप्सी जांच

मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी कैंसर व ब्लैक फंगस की बायोप्सी जांच

भीलवाड़ा
कैंसर की गांठ व ब्लैक फंगस की बायोप्सी जांच अब आसानी से भीलवाड़ा में हो सकेगी। यह सुविधा भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी लैब में शुरू कर दी गई है। अब तक यह जांच सुविधा निजी चिकित्सालय या फिर कृष्णा लैब के माध्यम से जयपुर भेजते थे। बायोप्सी की जांच होकर रिपोर्ट आने में ७ से १० दिन लगते थे। अब बायोप्सी सैम्पल बाहर भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे बच्चेदानी के कैंसर, अन्य कैसंर व ब्लैक फंगस के मरीजों की राहत मिलेगी। वही मरीजों को जांच के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ेगा। न्यूनत्तम शुल्क पर यह सुविधा सभी को मिल सकेगी।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य शलभ शर्मा ने बताया कि बच्चेदानी के कैंसर की जांच पेप सायटोलॉजी व कैंसर की गांठ की जांच स्टोपैथोलॉजी की मशीनें मेडिकल कालेज की पैथोलॉजी लैब में लगी हैं। इससे यह फायदा होगा की महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर की बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इसके लिए पेप सायटोलॉजी की जांच की जाती है, जिसकी मशीनें मेडिकल कॉलेज की पेथोलॉजी लैब में आ गई हैं। इस मशीन से बच्चेदानी के कैंसर का पता चल जाता है। ऐसे ही गांठ को निकालकर उसकी बायोप्सी करके कैंसर का पता चलता है, इसमें अलग-अलग मशीनों से प्रोसेस किया जाता है और 3-4 दिन में जांच रिपोर्ट आती है। इस प्रकार दोनों कैंसर की जांच की सुविधा मेडिकल कालेज की पेथोलॉजी लैब में शुरू हो गई है और मरीज को जयपुर जांच कराने की जरूरत नहीं होगी। एमसीआई की रिपोर्ट में भी यह बताया जाता है कि कितनी बायोप्सी हुई है। यह विभाग अब शुरू कर दिया है।
इलाज समय पर शुरू हो सकेगा
कैंसर का इलाज बिना बायोप्सी संभव नहीं है। जब जांच ही नहीं होगी तो इलाज भी नहीं हो सकता। बायोप्सी में जिस स्थान की बायोप्सी की जानी है, वहां से सैंपल लिया जाता है। जैसे पेट की बायोप्सी करानी है तो पेट की गांठ का टुकड़ा तथा लीवर की बायोप्सी करानी है तो लीवर की गांठ का टुकड़ा लिया जाता है। इसके बाद इसकी स्लाइड बनाई जाती है और बाद में इन गांठों के बारीक कणों को माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। बायोप्सी जांच के लिए काम आने वाली मशीन का खर्च 5 से 50 लाख रुपए है। एक जांच की कीमत १५० से २०० रुपए आती है। इस पर विचार कर रहे है कि मरीजों से यह शुल्क लिया जाय या नहीं।