
फोटो: पत्रिका
Example Of Hindu-Muslim Unity: कहते हैं कि रिश्तों की डोर अगर विश्वास और प्रेम से बंधी हो, तो मजहब की दीवारें बौनी पड़ जाती हैं। जिले के हनुमान नगर क्षेत्र के कुंचलवाड़ा गांव से निकली एक कहानी आज इसी सच्चाई को चरितार्थ कर रही है। यह कहानी है रामसिंह शक्तावत और उनकी धर्म की बहन रुबीना अंसारी की, जहां 'रक्षाबंधन' का त्योहार सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि एक जीवनभर का संकल्प बन गया है।
भीलवाड़ा के हनुमान नगर के सलीम अंसारी और रुबीना अंसारी की लाडली बेटी जनेफ अंसारी का निकाह आगामी 25 अप्रेल को तय तो हुआ, लेकिन खुशियों के आंगन में आर्थिक तंगी का साया गहराने लगा था। एक पिता की फिक्र और एक मां की बेबसी तब दूर हुई, जब कुंचलवाड़ा के भामाशाह रामसिंह शक्तावत आगे आए।
पिछले पांच वर्षों से रुबीना रामसिंह शक्तावत की कलाई पर राखी बांधती आ रही हैं, और जब इस बहन की आंखों में बेटी के कन्यादान की चिंता दिखी, तो भाई ने बिना देर किए 'राखी का धर्म' निभाने का ऐलान कर दिया।
रामसिंह शक्तावत ने न केवल आर्थिक मदद का हाथ बढ़ाया, बल्कि जनेफ के निकाह का संपूर्ण खर्च उठाने का जिम्मा लिया है। हाल ही में इस नेक पहल को लेकर एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें परिवार और रिश्तेदारों के साथ बैठकर निकाह की तैयारियों पर वैसे ही चर्चा हुई, जैसे एक सगा भाई अपनी भांजी के लिए करता है।
आगामी 25 अप्रेल को जब केकड़ी से सुभराती पठान दूल्हा बनकर देवली पहुंचेंगे, तो वहां केवल दो परिवारों का मिलन नहीं होगा, बल्कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की एक नई इबारत लिखी जाएगी। समाज में जहां अक्सर दूरियां बढ़ने की खबरें आती हैं, वहीं रामसिंह शक्तावत का यह कदम याद दिलाता है कि इंसानियत का मजहब सबसे ऊंचा है।
यह केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की जीत है जो एक बहन ने पांच साल पहले एक धागे के जरिए अपने भाई पर जताया था। क्षेत्र के लोग इस अनुकरणीय उदाहरण की सराहना कर रहा है, जो हमें सिखाता है कि रिश्ते खून से नहीं, बल्कि दिल की गहराई और निभाने की नीयत से बड़े होते हैं। उल्लेखनीय है कि हर वर्ष रक्षाबंधन के अटूट रिश्ते पर भामाशाह राम सिंह शक्तावत को क्षेत्र की सैकड़ों बहने रक्षाबंधन पर राखी बांधने पहुंचती हैं।
Published on:
07 Apr 2026 02:28 pm
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
