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भीलवाड़ा गारनेट अवैध वसूली कांड: CM भजनलाल के सख्त एक्शन से मची खलबली, प्रशासन और जिलाध्यक्ष से मांगा सीधा जवाब

Bhilwara Garnet Mafia: भीलवाड़ा में गारनेट माफिया से अवैध वसूली के आरोपों के बीच पुलिस महकमे में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी है। सीएमओ ने सख्ती दिखाते हुए जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा और आईपीएस माधव उपाध्याय की रिपोर्ट तलब की।

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CM Bhajanlal Sharma cracks down on Bhilwara garnet scam seeks report as MLA IPS come under scanner

अवैध गारनेट मामले में गिरफ्तार आरोपी (फोटो- पत्रिका)

Bhilwara Garnet Mining Scam: भीलवाड़ा: कोटड़ी-जहाजपुर क्षेत्र में गारनेट (रेत का सोना) माफिया से अवैध वसूली के मामले ने राजस्थान की सत्ता के गलियारों में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सीधे भीलवाड़ा भाजपा संगठन से जवाब-तलब किया है।

आईपीएस माधव उपाध्याय के एपीओ होने और जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का नाम सुर्खियों में आने के बाद अब जांच की आंच सत्ता की ऊपरी सीढ़ियों तक पहुंच गई है। माना जा रहा है कि भीलवाड़ा पुलिस महकमे में जल्द ही एक बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' देखने को मिल सकती है।

राजस्थान पत्रिका ने पुलिस, सत्ता और माफिया के गड़जोड़ के मुद्दे को दमदार तरीके से उठाया था। उसके बाद सरकार से लेकर पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। पत्रिका की खबर के बाद आईपीएस माधव को एपीओ किया और जहाजपुर विधायक गोपीचंद की कुंडली खंगालने का काम शुरू हुआ।

सीएम का सीधा दखल, जिलाध्यक्ष से मांगा कच्चा-चिट्ठा

जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के आरोपी अजय पांचाल से नजदीकियां और आईपीएस की संदिग्ध भूमिका पर मुख्यमंत्री शर्मा स्वयं नजर रख रहे हुए हैं। सीएम ने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा से लगातार दो दिन संपर्क कर विधायक की भूमिका और जिले के समीकरणों पर फीडबैक लिया।

विधायक मीणा के पास भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी होने के कारण सीएमओ इस मामले के हर पहलू को बारीकी से खंगाल रहा है। आईपीएस माधव को लेकर भी कई सवाल जिला संगठन से मुख्यमंत्री ने किए हैं।

रिमांड पर वसूली के आरोपी, उगलेंगे राज

जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के विधायक प्रतिनिधि एवं अवैध वसूली के मुख्य आरोपी अजय पांचाल समेत नंद सिंह, कालू गुर्जर और नारायण गुर्जर को पुर थाना पुलिस ने सोमवार शाम को सिविल न्यायाधीश (कोटड़ी) वर्षा आमेरा के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने चारों आरोपियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

अब रिमांड के दौरान पुलिस यह कबूल करवाने की कोशिश करेगी कि वसूली के तार महकमे में और राजनीति में कहां-कहां जुड़े हैं। अब तक कितनी वसूली की गई और कहां से वसूली के तार जुड़े हुए हैं, पता लगाया जाएगा। पुलिस आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट व वसूल की गई राशि के बारे में पता लगाएगी।

सीएमओ को भेजेंगे तथ्यात्मक रिपोर्ट

भाजपा जिलाध्यक्ष मेवाड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री शर्मा ने समूचे मामले को लेकर उनसे बातचीत की। सीएम ने जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा और आईपीएस माधव उपाध्याय को लेकर फीडबैक लिया। इसी प्रकार उन्होंने समूचे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट चाही है। यह रिपोर्ट जल्द भिजवा दी जाएगी।

अवैध वसूली मामले में आईपीएस माधव एपीओ

भीलवाड़ा के कोटड़ी क्षेत्र में गारनेट माफिया से अवैध वसूली मामले में संदिग्ध भूमिका सामने आने पर एएसपी वृत्त भीलवाड़ा सदर (आईपीएस) माधव उपाध्याय को एपीओ कर दिया है। इसके आदेश संयुक्त शासन सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह ने सोमवार को जारी किए।

उल्लेखनीय है कि गारनेट माफिया से अवैध वसूली मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था और इसमें आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इस मुद्दे को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। वहीं, गिरफ्तार आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है।

विधायक ने कराई थी मुलाकात

गिरफ्तार चार लोगों में से एक अजय पांचाल जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का खास है। विधायक गोपीचंद ने ही अजय की मुलाकात पुलिस अधिकारियों से करवाई थी। आरोपी पांचाल की गिरफ्तारी के बाद विधायक गोपीचंद मीणा पर भी सवालों के घेरे में हैं।

भीलवाड़ा में गारनेट माफिया से अवैध वसूली और और उसमें एक आईपीएस अधिकारी की संदिग्ध भूमिका ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाकी पर भरोसा तब ही डगमगाता है, जब वही तंत्र संरक्षण देने के आरोपों से घिर जाए। आईपीएस माधव उपाध्याय को एपीओ किया जाना स्पष्ट रूप से सिस्टम के भीतर पनप रहे उस गठजोड़ की स्वीकारोक्ति है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा।

हालांकि, एपीओ करना भी कोई सजा नहीं है, इस मामले में अधिकारी उपाध्याय पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। यह प्रकरण साफ बताता है कि माफिया और सत्ता के बीच की दूरी खतरनाक रूप से कम हो चुकी है।

ऐसे में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले। पत्रिका की सक्रियता ने इस मामले को उजागर किया है, जो लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। अब जरूरत है कि सरकार इस अवसर को सुधार की दिशा में ठोस कदम में बदले, ताकि रक्षक की भूमिका फिर से विश्वास का प्रतीक बन सके।