राजस्थान में रिटायर्ड सहायक रजिस्ट्रार हजारी लाल विश्नोई की उम्र भले ही 95 साल को पार कर गई, लेकिन देश में वर्ष 1952 में हुए पहले चुनाव से उनकी कई यादे जुड़ी हुई है। वह बताते है कि चुनाव के दौरान वह भी एक पोलिंग पार्टी के सदस्य थे।
भीलवाड़ा जिले के नया समेलिया निवासी विश्नोई बताते है कि भीलवाड़ा में प्रथम चुनाव वर्ष 1952 में हुए थे। उस समय लोगों को चुनाव का पूर्ण ज्ञान नहीं था, वोट देने की बात चली तो कई लोगों ने कहा कि हम ना तो राज के झगड़े में पड़ेगे और नहीं कांग्रेस के झगड़े में। हम तो धरती माता को वोट देंगे, आगे धरती माता ही जाने। मतदान के दिन कई लोगों ने धरती माता को धोक देकर वोट धरती पर ही रख दिए, बाद में निर्वाचन अधिकारी ने वोटों को एकत्रित किया और मतदान पेटी में डालें और भीलवाड़ा में पहली बार राम राज्य परिषद का सदस्य जीता
नेहरु के लिए भी नहीं खोला फाटक
बिश्नोई बताते है कि वर्ष 1952 के ही चुनावी साल में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जिले के ही सुवाणा (भीलवाड़ा) गांव आए थे। वह जिसे रोड से गुजरे थे, उसका नाम वर्तमान में नेहरू रोड है। वह बताते है कि जब प्रधानमंत्री का काफिला भीलवाड़ा में रेलवे फाटक (पहले अजमेर चौराहा पुलिया के स्थान पर थी ) पर पहुंचा, उस समय रेलवे फाटक बंद था, रेल का इंतजार किया जा रहा था।
लोगों ने रेलवे कर्मियों को कहा कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री आए हैं, फाटक को खोला जाए, उसे समय रेलवे कर्मियों ने फाटक खोलने से मना कर दिया। रेलवे कर्मियों की कार्य के प्रति कर्मठता को देखते हुए नेहरु बहुत प्रसन्न हुए और कर्मचारियों की पीठ थपथपाई और कहा कि देश को आप जैसे नौजवानों की जरूरत है।