भीलवाड़ा

Rajasthan Election: ‘हाथ’ नहीं कभी दो बैल था कांग्रेस का चुनाव चिन्ह, वक्त के साथ सब कुछ बदला, जानिए इतिहास

Rajasthan Election: विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार प्रसार शुरू हो चुका है। निर्वाचन विभाग मतदाताओं को जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। चुनाव के प्रचार प्रसार के साथ मतदान के तरीकों में भी वक्त के साथ बदलाव आया है।

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Nov 13, 2023

rajasthan election विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार प्रसार शुरू हो चुका है। निर्वाचन विभाग मतदाताओं को जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। चुनाव के प्रचार प्रसार के साथ मतदान के तरीकों में भी वक्त के साथ बदलाव आया है। बुजुर्ग मतदाताओं से रूबरू होकर उनको अनुभव को साझा किया। पहले चुनाव में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होता था, किसी तरह का मनमुटाव भी नहीं होता था। प्रत्याशी आजकल तो पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं, लेकिन पहले अधिक धनराशि खर्च नहीं होती थी।मतदान कागज में प्रत्याशी के नाम के आगे ठप्पा लगाकर कागज को मोडकर मत पेटी में डालते थे। आज बदलाव हो गया है। बड़े बुजुर्ग की राय पर वोट डालते थे। आज परिवारों में अपने अपने हिसाब से वोट डालते हैं। वोट को लेकर प्रत्याशियों का प्रचार प्रसार भी अलग तरीके से ही होता था।
राम निवास बिड़ला, सदर बाजार मांडल

चुनाव कोई भी हो हर एक चुनाव का मजा होता था । सरपंच व वार्ड पंचों के चुनाव खुली जगहों पर होते थे ।सभी हाथ उठाकर समर्थन देते थे । जिसके अधिक हाथ खड़े होते उसको विजेता घोषित कर दिया जाता था । पहली बार विधानसभा चुनाव में गाडी में प्रत्याशी यो को आवंटित चिन्ह के अलग अलग बॉक्स थे । उन्ही के अंदर गुलाबी रंग का बैलेट डालना होता था । आजादी के बाद विधानसभा चुनाव में बदलाव आया । प्रचार के लिये प्रत्याशी को गाड़ी पार्टी से मिलती थी । उसी में कार्यकर्ताओं के साथ घूमते थे।


पहले कांग्रेस का चुनाव चिन्ह दो बैल था । बाद में गाय बछडा आया व अब हाथ हो गया । आवागमन के साधन नही थे । प्रचार प्रसार के प्रत्याशी का नाम चुनाव चिन्ह लोहे के प्लेट बना कर दीवारों पर हड़मच से पोत देते थे ।
जानकी लाल तिवाड़ी, तिवाडी मोहल्ला मांडल


पंच पटेल बोलते थे उसको देते वोट
पहले वोट ग्राम के बुजुर्गों पंच-पटेल के अनुसार देते थे । प्रचार ग्राम में मुख्य स्थान पर ही होता था।लोगों मे जागरूकता नही थी। कागज पर मोहर लगानी पड़ती थी । समझ मे नही आता था तो अंदर चुनाव कराने वालों को कह कर कागज पर मोहर लगा देते थे। कोई मनमुटाव नही था।
पूषा लाल सेन

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समूह में जाती थी महिलाएं...
पहले गांव की सभी महिलाएं समूह में एक साथ वोट डालने जाती थी। कोई मनमुटाव नहीं था। जैसा कहते थे वैसे डाल देते थे।
लहरी देवी जीनगर

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