
खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस कितने एरिये में देने है और किस किस्म की भूमि में दिए जाने है, यह खान विभाग के अधिकारियों को भी पता नहीं है
भीलवाड़ा।
खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस कितने एरिये में देने है और किस किस्म की भूमि में दिए जाने है, यह खान विभाग के अधिकारियों को भी पता नहीं है। विभाग की ओर से 28 फरवरी 2017 को जारी नई खनिज नीति में अफसर इस बात को शामिल करना भूल गए कि खातेदारी में क्वारी लाइसेंस देने के क्या नियम होंगे। इस बड़ी चूक से बिजौलियां, चित्तौडग़ढ़, जोधपुर , बालेसर आदि जगह पिछले 13 माह में एक भी क्वारी लाइसेंस जारी नहीं हुआ।
खान विभाग की ओर से 1998 से खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस दिए जा रहे थे। वर्ष 2013 में सरकार ने नई नियमावली बनाने का तर्क देकर इस पर रोक लगा दी। नई नीति बनने में चार साल लग गए। इसके बाद फरवरी 2017 में नई नीति भी आ गई, लेकिन अफसरों ने यह शामिल नहीं किया कि खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस कैसे दिए जाएंगे। इस कारण यह उद्योग विस्तार नहीं ले पाया है।
न्यूनतम एरिया निर्धारित, लेकिन किस्म को लेकर संशय
खान विभाग के अधिकारियों ने विभाग से मार्गदर्शन मांगा है कि राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 2017 के नियमों के अनुसार, क्वारी लाइसेंस का न्यूनतम क्षेत्रफल 1800 वर्ग मीटर निर्धारित है, परंतु न्यूनतम क्षेत्रफल खातेदारी भूमि के लिए कितना माना जाए, यह स्पष्ट नहीं है तथा किस-किस किस्म की भूमि में क्वारी लाइसेंस जारी किया जाना है तथा किसमें बाध्यता रहेगी। ये सब स्पष्ट नहीं है।
हमने ध्यान दिलाया तो मार्गदर्शन मांगा
सरकार ने 28 फरवरी 2017 को नई खनिज नीति जारी की थी। इसमें खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस किसे और कैसे दिए जाएंगे यह शामिल नहीं किया। 13 माह हो गए लेकिन किसी ने इसकी जानकारी नहीं ली है। अब हमने मांग की है तो विभाग के अफसरों ने उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा है। इससे बिजौलियां सहित कई जगह सेंड स्टोन का कारोबार प्रभावित हो रहा है। -रामप्रसाद विजयवर्गीय, कार्यालय मंत्री, ऊपरमाल पत्थर खान व्यवसायी संघ, बिजौलिया
जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी
खातेदारी भूमि में सेंड स्टोन के क्वारी लाइसेंस देने में अभी समस्या आ रही है। विभाग से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है। स्पष्ट होते ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। -अविनाश कुलदीप, अधीक्षण खनि अभियंता
Published on:
28 Apr 2018 03:34 pm
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