
Children in dilapidated schools will receive nutrition along with safety.
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों के जर्जर और असुरक्षित भवनों में पढ़ रहे नौनिहालों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग उन्हें नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में अस्थायी रूप से शिफ्ट करने जा रहा है। लेकिन इस स्थानांतरण के बीच बच्चों के पोषण और उनकी पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की गई है। शासन सचिव (शिक्षा) विश्वमोहन शर्मा के अनुसार, भले ही स्कूल की बिल्डिंग बदल जाए, लेकिन बच्चों का नामांकन, उपस्थिति और भोजन वितरण की व्यवस्था उनके मूल स्कूल (पुराने स्कूल) के नाम से ही संचालित होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पृथक से आदेश जारी न हों, राजसिम्स पोर्टल पर विद्यार्थियों की एंट्री और नामांकन में कोई बदलाव या किसी प्रकार का 'विलय' नहीं किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रशासनिक और वित्तीय अभिलेख पूर्ववत व्यवस्था के अनुसार ही संधारित रहें।
शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को पांच बिंदुओं पर कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जर्जर स्कूल से शिफ्ट हुए बच्चों की हाजिरी और नामांकन उनके मूल स्कूल के नाम से ही दर्ज होगा। पीएम पोषण (मिड-डे मील) और पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत दूध व भोजन का वितरण नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। स्टॉक रजिस्टर, व्यय और भुगतान संबंधी सभी दस्तावेज मूल विद्यालय के नाम से ही पूर्ववत रखे जाएंगे। भोजन और दूध की गुणवत्ता, मात्रा और समयबद्ध वितरण की जिम्मेदारी संबंधित पीईईओ, सीबीईईओ और जिला शिक्षा अधिकारी की होगी। शासन सचिव ने निर्देश दिए हैं कि अस्थायी स्थानांतरण की स्थिति में भी योजनाओं का उद्देश्य और पारदर्शिता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि बरसात और पुरानी इमारतों के खतरे के बीच बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना एक सराहनीय कदम है। अब जिम्मेदारी जमीनी स्तर के अधिकारियों की है कि वे इन आदेशों की पालना पूरी संजीदगी से करें।
Updated on:
08 Jan 2026 09:09 am
Published on:
08 Jan 2026 09:08 am
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