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भक्ति के रंग: भक्तामर विधान में उमड़ा आस्था का सैलाब, मुनि बोले- कर्म काटने के लिए करें आराधना

The colors of devotion: A surge of faith witnessed at the Bhaktamar Vidhan ceremony.

The colors of devotion: A surge of faith witnessed at the Bhaktamar Vidhan ceremony.

आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के सामने तरणताल परिसर में सोमवार को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रुतसंवेगी मुनि आदित्यसागर के सान्निध्य में आयोजित भक्तामर मंडल विधान का समापन भक्ति और हर्षोल्लास के साथ हुआ।

मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ पांडाल

मुनि अप्रमित सागर के मंत्रोच्चारण के बीच इंद्र-इन्द्राणियों ने श्रीजी के दरबार में भक्ति नृत्य किया। विधान की शुरुआत मुख्य पात्रों की ओर से मंगल कलश स्थापना के साथ हुई। इसमें सौधर्म इंद्र महेंद्र-विपिन सेठी, कुबेर इंद्र विकास सेठी, चक्रवर्ती नरेश गोधा, बाहुबली इंद्र राजेंद्र कुमार और महायज्ञ नायक सुरेश बडजात्या समेत अन्य श्रृदालुओं ने धर्म लाभ लिया।

आराधना समय काटने के लिए नहीं, कर्म काटने के लिए होती है

मुनि आदित्य सागर ने कहा कि जीवन में सुख-सुविधाएं भले ही कम हों, लेकिन अनुभव की पूंजी भरपूर होनी चाहिए। प्रभु की भक्ति, समर्पण और पुण्य का अनुभव ही जीवन की सच्ची शांति है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग भक्ति और आराधना को केवल समय बिताने का साधन मान लेते हैं, जबकि वास्तव में आराधना 'समय' काटने के लिए नहीं, बल्कि जन्म-जन्मान्तर के 'कर्म' काटने के लिए की जाती है।

पुण्य का बीज काट देता है दुखों का पर्वत

मुनि ने आचार्य वीरसेन स्वामी के धवलाजी ग्रंथ का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे वटवृक्ष का एक छोटा सा बीज पत्थर की चट्टान को भी दो टुकड़ों में फाड़ देता है, वैसे ही अल्प मात्रा में किया गया दान और पुण्य क्रिया हमारे दुखों के बड़े-बड़े पर्वतों को नष्ट करने की शक्ति रखती है। 24 घंटे के पापों के बीच किया गया थोड़ा सा शुभ कार्य भी मोक्ष मार्ग प्रशस्त करता है। इससे पहले सौधर्म इंद्र महेंद्र सेठी के आवास से शोभायात्रा निकाली गई।

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