
Construction of Jinalaya is not just construction of temple, establishment of actual 'Jin rule': Muni Adityasagar
भीलवाड़ा शहर के केसरिया पारस रोड स्थित केसरकुंज में शनिवार का दिन भक्ति और आस्था के महाकुंभ का गवाह बना। मौका था नव निर्मित चैत्यालय में जिन प्रतिमाओं की वेदी प्रतिष्ठा का। मुनि आदित्य सागर, मुनि अप्रमित सागर और मुनि सहज सागर के सानिध्य में मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच भगवान शांतिनाथ, चंद्रप्रभु और पार्श्वनाथ को वेदी में विराजमान किया गया।
मुनि आदित्य सागर ने कहा कि जिनालय की स्थापना करना केवल ईंट-पत्थर का मंदिर बनाना नहीं है, बल्कि यह साक्षात 'जिन शासन' की स्थापना करने जैसा महान कार्य है। उन्होंने कहा कि संसार में हर किसी को जिनेन्द्र भगवान के दर्शन का सौभाग्य नहीं मिलता। आप सभी अत्यंत भाग्यशाली हैं कि भगवान स्वयं चलकर आपके द्वार आए हैं।
शांतिनाथ दिगंबर जैन सेवा समिति के सचिव नीरज शाह ने बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत सुबह मंदिर से घटयात्रा के साथ हुई। सिर पर कलश लिए महिलाएं मंगल गीत गाती चल रही थीं। मुख्य मार्गों से होते हुए यात्रा पुनः मंदिर पहुंची, जहां अभिषेक और शांतिधारा की गई। भगवान के सिंहासन नेमीचंद बधेरवाल, सोमेश जैन तथा सुशीला गदिया ने दिए। शांतिधारा के लिए झारी प्रकाश गंगवाल, भागचंद विजय काला व सुरेश बडजात्या ने, मुकुट राकेश पाटनी, चांदी के छत्र पूनम सेठी, तरूण जैन व भागचंद, गंगोधक का पात्र प्रदीप कासलीवाल ने प्रदान किया।
वेदी प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद मुनि आदित्य सागर ससंघ विहार करते हुए हाउसिंग बोर्ड शास्त्रीनगर स्थित सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। यहां शाम को भव्य गुरु भक्ति और आरती का आयोजन हुआ। रविवार सुबह 7 बजे अभिषेक, शांतिधारा और मुनि के प्रवचन होंगे। अहार चर्या के बाद सुबह 11:30 बजे: हाउसिंग बोर्ड स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में मुनि आदित्य सागर शामिल होंगे। मुनि संसघ रविवार दोपहर को यहां से बांसवाड़ा के लिए विहार करेंगे। रात्रि विश्राम रविवार को हमीरगढ़ रोड स्थित नितिन स्पिनर्स पर होगा। 26 जनवरी को आहर चर्या अपना ढाबा के पास होगी। मुनि 19 से 24 फरवरी तक बांसवाड़ा में पंच कल्याणक करवाएंगे।
Published on:
24 Jan 2026 08:23 pm
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