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भीलवाड़ा का ‘सोना’ विदेश में चमक रहा, जिले में उद्योग को सरकारी ‘खाद-पानी’ का इंतजार

Bhilwara's yellow gold (maize): राजस्थान का 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाने वाला भीलवाड़ा अब मक्का उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश का सिरमौर बन चुका है, लेकिन सरकारी नीतियों की स्पष्टता के अभाव में यहां का 'पीला सोना' (मक्का) अपनों के काम आने के बजाय सात समंदर पार और पड़ोसी राज्यों की झोली भर रहा है।

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भीलवाड़ा का पीला सोना 'मक्का' की विदेशों में चमक, पत्रिका फोटो

भीलवाड़ा का पीला सोना 'मक्का' की विदेशों में चमक, पत्रिका फोटो

Bhilwara's yellow gold (maize): राजस्थान का 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाने वाला भीलवाड़ा अब मक्का उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश का सिरमौर बन चुका है, लेकिन सरकारी नीतियों की स्पष्टता के अभाव में यहां का 'पीला सोना' (मक्का) अपनों के काम आने के बजाय सात समंदर पार और पड़ोसी राज्यों की झोली भर रहा है।

भीलवाड़ा में मक्का आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन जमीन और पानी की उपलब्धता जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार की चुप्पी ने उद्यमियों के हाथ बांध रखे हैं। नतीजा यह है कि भीलवाड़ा का निवेशक अब मध्य प्रदेश के नीमच का रुख करने को मजबूर है।

नीमच ले जा रहा निवेश, भीलवाड़ा के हाथ खाली

जिले के उद्यमियों का कहना है कि वे फूड प्रोसेसिंग और एथेनॉल प्लांट लगाने को तैयार हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। यदि सरकार रियायती दरों पर जमीन और पानी का इंतजाम करे, तो जिले में दर्जनों इकाइयां लग सकती हैं। वर्तमान में सुविधाओं के अभाव में ये बड़े प्रोजेक्ट्स एमपी के नीमच में शिफ्ट हो रहे हैं। इससे भीलवाड़ा को न केवल राजस्व का घाटा हो रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी छिन रहे हैं।

हमारे मक्का की खाड़ी देशों तक है डिमांड

भीलवाड़ा की मंडी से जुड़े शिव गगरानी बताते हैं कि जिले में सालाना औसतन 3.5 लाख टन से अधिक मक्का पैदा हो रहा है। जिले में कोई बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने के कारण यह मक्का गुजरात के गांधीधाम भेजा जाता है। वहां से इसकी पैकिंग होकर यह सऊदी अरब, कतर, दुबई, कुवैत और कनाडा जैसे देशों में निर्यात हो रहा है।

मक्का का गणित: कहां कितनी मांग

जिले में दो तरह की मक्का का उत्पादन हो रहा है। देशी मक्का मुख्य रूप से भोजन के उपयोग में। हाइब्रिड (शंकर) मक्का पोल्ट्री फार्म, पशु आहार संयंत्र और एथेनॉल बनाने में भारी मांग। खपत वर्तमान में भीलवाड़ा का मक्का हरियाणा, पंजाब, अजमेर और लाम्बिया (रायला) के पशु आहार केंद्रों में जा रहा है। प्रति वर्ष लगभग 5 लाख क्विंटल मक्का की औद्योगिक मांग बनी रहती है।

उत्पादन में भीलवाड़ा 'सिरमौर'

  • कृषि विभाग के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि मक्का उत्पादन में भीलवाड़ा ने पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।
  • टॉप-5 जिलों में भीलवाड़ा अव्वल है। जबकि चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा तथा राजसमंद जिले शामिल है।

सरकार को करनी होगी पहल

सरकार किसानों और उद्यमियों के हित में नीति बनाए तो भीलवाड़ा का मक्का यहीं की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। एथेनॉल प्लांट के लिए सरकार को पहल करनी होगी।
-शिव गगरानी, पूर्व निदेशक, कृषि मंडी भीलवाड़ा

पत्रिका विजन: क्या हो समाधान

  • सरकार एथेनॉल उत्पादन के लिए विशेष सब्सिडी और लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी लाए।
  • फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 'मक्का क्लस्टर' विकसित किया जाए।
  • स्थानीय स्तर पर वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाई जाए।