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जनसंख्या को रोको भाई…लाख रोगा री एक दवा…

पदमश्री भांभू ने चेताया-आबादी पर लगाम नहीं कसी तो कम पड़ जाएगी जमीन-हवा-पानी

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जनसंख्या को रोको भाई...लाख रोगा री एक दवा...

जनसंख्या को रोको भाई...लाख रोगा री एक दवा...

भीलवाड़ा जनसंख्या को रोको भाई...लाख रोगा री एक दवा...यह सब चीजां कम पड़ ज्यासी पानी, धरती और हवा। आबादी पर नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले समय में हर व्यक्ति को परेशानी होगी। यह कहना है नागौर निवासी पद्मश्री हिम्मताराम भांभू का।

बुधवार को भीलवाड़ा में स्मृति वन में पौधा लगाने के बाद भांभू ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि सात ज पर काम करने की जरूरत है-जल, जंगल, जीव, जमीन, जैविक, जलवायु व जनसंख्या। वे छह ज पर काम कर रहे हैं, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण सरकार का काम है।
भांभू पर्यावरण संरक्षण व वन्यजीवों की रक्षा कार्य को देखते 8 नवंबर 2021 को पदमश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा, एक आदमी को जीवन में 9.50 करोड़ रुपए के ऑक्सीजन की जरूरत होती है, लेकिन जीवन में एक भी पेड़ नहीं लगाता। आदमी 5 मिनट बिना ऑक्सीजन नहीं रह सकता।

11 हजार पौधे लगा बनाया जंगल
भांभू ने 50 वर्षों में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए। इनमें साढ़े तीन लाख पौधे पेड़ बन चुके हैं। वैज्ञानिक शोध के अनुसार ये पेड़ एक साल में 12 अरब रुपए की ऑक्सीजन छोड़ रहे हैं। उन्होंने नागौर के निकट हरिमा गांव के पास 25 बीघा जमीन पर 11 हजार पौधे लगाकर जंगल बना दिया। खेत में 300 से अधिक मोर, हजारों पक्षी, रेंगने वाले जीव हैं।
वन्यजीवों के लिए लड़ते हैं मुकदमे

भांभू पर्यावरण संरक्षण के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी करते हैं। शिकारियों के खिलाफ 30 से अधिक मुकदमे लड़ चुके हैं। मुकदमों का खर्च भी खुद उठाते हैं। 30 में से 13 प्रकरण में 18 मुल्जिमों को सजा हुई।

स्मृतिवन ऑक्सीजन की फैक्ट्री
भांभू ने कहा कि भीलवाड़ा का स्मृति वन ऑक्सीजन की फैक्ट्री है। यहां कई तरह के पेड, पौधे व जीव जन्तु है। पर्यावरण प्रेमी बाबूलाल जाजू ने स्मृति वन की जानकारी दी। सुखाराम चौधरी, शिवनाथ सिंह, रामेश्वर सांखला, हरिराम पूनिया भी मौजूद थे।