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पांच साल से बंधा कोर्ट का आदेश सरकारी फाइलों में

नगर विकास न्यास की पेराफेरी के गांव नया समेलिया में डीएलसी दर से जमीनों की कीमतें वसूलें जाने के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश गत पांच साल से सुवाणा पंचायत समिति के फाइलों में बंद है। आदेश की अनदेखी होने से बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जे हो गए है। इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।

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Court order tied for five years in government files

Court order tied for five years in government files

भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास की पेराफेरी के गांव नया समेलिया में डीएलसी दर से जमीनों की कीमतें वसूलें जाने के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश गत पांच साल से सुवाणा पंचायत समिति के फाइलों में बंद है। आदेश की अनदेखी होने से बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जे हो गए है। इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।

नवगठित ग्राम पंचायत गठिला का खेड़ा के नया समेलिया गांव का हिस्सा नगर विकास न्यास की पेराफेरी में आने से यहां की कीमतें महज एक दशक में कई गुणा महंगी हो गई है। करीब एक दशक पूर्व यह गांव आटूण ग्राम पंचायत का हिस्सा था। इसी दौरान आटूण ग्राम पंचायत से भूमि आवंटन का रिकार्ड खुर्दबुर्द होने से करोड़ों रुपए की जमीन की बंदरबांट फर्जी पट्टों से हो गई थी। यहां नवम्बर १९९८ से मार्च १९९९ की अवधि के बीच कई पट्टे पुराने स्टाम्प पेपर व फर्जी दस्तावेजों से जारी हुए है। आटूण पंचायत में इस अवधि का रिकार्ड नहीं होने से कईयों ने पट्टे असली होना मानते हुए यहां जमीनें खरीद ली, लेकिन हकीकत सामने आई तो उनके पैरों तलें जमीन खिसक गई। जबकि कई प्रभावशाली राजनीति पहुंच का फायदा उठाते हुए अभी भी अवैध कब्जा जमाए हुए है।


पत्रिका ने उजागर किया, निरस्त हुए पट्टे

राजस्थान पत्रिका ने 6 जुलाई 2011 के अंक में समूचा मामला बिना पट्टे के गांव शीर्षक समाचार से उजागर किया था। इस पर तत्कालीन जिला कलक्टर के निर्देश पर सतर्कता समिति में 35/2011 पर प्रकरण दर्ज हुआ। तत्कालीन उपखंड अधिकारी ने मामले की जांच की तो इसमें पुराने स्टाम्प व फर्जी दस्तावेजों से पट्टे जारी होने की पृष्टि हुई। इस पर सदर थाने में प्रकरण दर्ज हुआ। तत्कालीन विकास अधिकारी सुवाणा को उक्त पट्टों को निरस्त कराने के लिए जिला निगरानी न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए लिखा गया। उक्त प्रकरण में जिला सतर्कता समिति के निर्देशानुसार विकास अधिकारी सुवाणा के द्वारा कुल 61 निगरानियां प्रस्तुत की गई। जिला निगरानी न्यायालय ने निगरानियां स्वीकार कर सभी पट्टे निरस्त कर दिए।

हाईकोर्ट ने कहा पैसे जमा कराओ

इसी मामले में ६१ भूखंडधारकों में से २९ ने जमीन पर अपने कब्जे को सही बताते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील प्रस्तुत की। राजस्थान उच्च न्यायालय ने दायर अपील पर सुनवाई करते हुए 19 अक्टूबर 2016 को फैसला सुनाया। आदेशानुसार 15 दिवस में परिवादी गण पंचायत समिति सुवाणा की स्थापना समिति के समक्ष उपस्थित हो कर डीएलसी दर से भूखण्ड की राशि जमा करावें और भूखण्डों का कब्जा लेवें। जिन प्रकरणों में अपील दायर नहीं की हैं, उनका कब्जा सरकार ले ले।

पांच साल में नहीं हो सकी पालना
हाईकोर्ट के आदेश को जारी हुए पांच वर्ष से अधिक समय बीत गया, किन्तु पंचायत समिति सुवाणा की तरफ से न्यायालय के आदेश की पालना नहीं हो सकी। पंचायत समिति ने ना तो डिमांड नोटिस ारी किए ना ही कब्जा लेने की कार्रवाई की। इतना ही नहीं आदेश की पालना में किसी अन्य ने भी डीएलसी दर से राशि जमा कर भूखण्ड का कब्जा सरकार से नहीं लिया। यहां अभी विवादित भूखंडों में अधिकांश पर पक्के निर्माण है।

जारी नहीं डिमांड नोटिस
भूखंड धारक नारायण लाल शर्मा, मोहन लाल, कैलाश, गंगा देवी,शंकरलाल,अशोक पारीक, जमना लाल आदि का कहना है कि उन्होंने सालों पूर्व तत्कालीन सरपंच के जरिए जमीन खरीदी। पट्टे निरस्त होने पर हाईकोर्ट में अपील की, हाईकोर्ट के आदेश की पालना में राशि जमा कराने के लिए हम तैयार है, हमनें डिमांड नोटिस जारी करने के लिए सुवाणा पंचायत समिति को रजिस्टर्ड डाक के जरिए सूचित किया, लेकिन पंचायत समिति ने आज तक डिमांड नोटिस जारी नहीं किए। हमारी तरफ से न्यायालय के आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है।

आदेश की करेंगे समीक्षा
राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बारे में जानकारी नहीं है। आदेश की कॉपी मंगा कर समीक्षा की जाएगी और संबधित से भी रिपोर्ट ली जाएगी। कही गलत हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक शर्मा, विकास अधिकारी सुवाणा