
हमारे यहां के धागे की 60 देशों में मांग
सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
हमारे यहां बनने वाले धागे की विदेशों में भी काफी मांग है। भीलवाड़ा में 18 स्पिनिंग इकाइयां में प्रतिदिन एक हजार टन धागे का उत्पादन होता है। इसमें से 60 फीसदी धागा 60 से अधिक देशों निर्यात होता है। इस धागे की चीन, बांग्लादेश, पौलेंड, टर्की, ब्राजील, जर्मनी, इजिप्ट, कॉलम्बिया, मैक्सिको, चिली, श्रीलंका आदि देश में काफी मांग है। इन देशों की मांग पूरी करने के लिए यहां की मशीनें कभी नहीं रुकती हैं। लगातार 24 घंटे यहां धागा तैयार होता है। यहां धागा तैयार करने की 18 फैक्ट्रियां हैं। इनमें कपास या पॉलीस्टर फाइबर से 20 से लेकर 60 विभिन्न काउंट का धागा बनता है। विभिन्न प्रक्रिया से गुजरने के बाद एक्सपोर्ट पैकिंग के लिए धागा तैयार होता है। इसके लिए भी उद्यमियों ने अत्याधुनिक मशीने लगा रखी हैं। सबसे पहले कपास की गांठ आती है, जो ब्लोरूम मशीन में साफ होती है। उसके बाद इसकी क्लीनिंग, ओपनिंग होकर मिक्सिंग होती है। तब जाकर धागा तैयार होता है।
सोलर प्लांट से बिजली की बचत
धागा फैक्ट्री में सोलर प्लांट लगे हैं। इससे बिजली की भी बचत होती है। सोलर पैनल से बिजली की काफी मांग पूरी हो रही है। सबसे बड़ी बात है कि यह सभी स्पिनिंग इकाइयां प्रदूषण रहित हैं।
आधुनिक तकनीक की मशीनें हैं भीलवाड़ा में
राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन एसएन मोदानी ने बताया कि भीलवाड़ा के सभी स्पिनिगं उद्योगों में अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं। कपास की सफाई से लेकर ऑटोमेटिक मशीनों से ही धागा बनता है। अच्छे किस्म के कपास के साथ ऑटोमेटिक मशीनों से प्रक्रिया से गुजरने के बाद एक्सपोर्ट क्वालिटी का धागा बनता है। धागा तैयार होने के बाद यहां लेबोरेट्री में उसकी जांच की जाती है। टेस्टिंग में खरा उतरने के बाद ही धागा फैक्ट्रियों तक पहुंचता है।
40 हजार लोगों को रोजगार
18 स्पिनिंग मिलों में 40 हजार लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें 2 हजार से अधिक महिलाएं हैं। साथ ही श्रमिक को काम सिखाने के लिए ट्रेनिंग सेन्टर तक खोल रखा है। मोदानी का कहना है कि देश व राजस्थान का एक मात्र टेक्सटाल उद्योग क्षेत्र भीलवाड़ा है, जहां स्पिनिंग में अत्याधुनिक मशीनें लगी है। यहां करीब 11.74 लाख स्पिंडल लगे है।
60 देशों में हो रहा निर्यात
वस्त्रनगरी से इजिप्ट, टर्की समेत 60 से अधिक देशों में कॉटन यार्न (सूती धागा) निर्यात किया जा रहा है। यहां नितिन स्पिनर्स, सुदिवा, लग्नम तथा आरएसडब्ल्यूएम मिलांज आदि मुख्य रूप से कॉटन यार्न बना रही हैं। कंचन इण्डिया लिमिटेड, संगम ग्रुप सहित अन्य मिलें खुद के लिए भी धागा तैयार कर रही हैं। दोनों मिलें कॉटन यार्न का उपयोग डेनिम के लिए कर रही हैं। यह निर्यात उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक होता है। जिसकी कीमत करीब 1200 करोड़ रुपए है।
फैक्ट फाइल
2000 टैक्सटाइल मार्केट की दुकानें
14 जिनिंग उद्योग
18 स्पिनिंग
425 वीविंग
18 प्रोसेस हाउस
30 रेडिमेड इकाई
80 टीएफओ
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उत्पादन प्रतिवर्ष
80 करोड़ मीटर कपड़ा
25 करोड़ मीटर डेनिम
3.50 लाख टन यार्न
Published on:
08 Nov 2021 08:53 am
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