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पाबंदी के बावजूद भीलवाड़ा में रोजाना उठ रहा 60 टन प्लास्टिक कचरा

भीलवाड़ा नगर परिषद व भीलवाड़ा प्रदूषण नियंत्रण मंडल नहीं कर पा रहा ठोस कार्रवाई

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भीलवाड़ा नगर परिषद व भीलवाड़ा प्रदूषण नियंत्रण मंडल नहीं कर पा रहा ठोस कार्रवाई

भीलवाड़ा नगर परिषद व भीलवाड़ा प्रदूषण नियंत्रण मंडल नहीं कर पा रहा ठोस कार्रवाई

Bhilwara news : केन्द्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय का 100 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक के सामान और पॉलीथिन पर पाबंदी दो साल बाद भी असरकारी साबित नहीं हो रही है। भीलवाड़ा शहर के 70 वार्ड में प्रतिदिन 220 टन कचरा निकलता है। इसमें लगभग एक चौथाई यानी 60 टन कचरा प्लास्टिक होता है। यह शहर की आबोहवा बिगाड़ रहा है।

नगर परिषद प्रशासन अमानक पॉलीथिन बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई करता है लेकिन प्लास्टिक निर्माता फैक्ट्री, स्टॉकिस्ट व विक्रेता पर कार्रवाई नगण्य हो रही है। प्लास्टिक जिस मात्रा में कचरे में पहुंच रहा है, उससे कई गुना ज्यादा रोजाना बिक रही है।

40 एमएम है तो सिंगल यूज प्लास्टिक

40 या कम माइक्रोमीटर की प्लास्टिक सिंगल यूज प्लास्टिक में शुमार है। इसमें सब्जी के पॉलीथिन कैरीबैग, चाय के प्लास्टिक कप, चाट गोलगप्पे की प्लास्टिक प्लेट, बाजार से खरीदी पानी की बोतल, स्ट्रॉ, सिंगल यूज प्लास्टिक से बने उत्पाद हैं।

एक जुलाई 2022 से प्रतिबंध

1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के उत्पादन, बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध है। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की कुल 19 वस्तुओं पर यह प्रतिबंध लागू है। इनमें थर्माकोल प्लेट, कप, गिलास, कटलरी जैसे कांटे, चम्मच, चाकू, ट्रे, मिठाई के बॉक्स पर लपेटी जाने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट की फिल्म, प्लास्टिक के झंडे, गुब्बारे की छड़ें और आइसक्रीम स्टिक, कैंडी स्टिक और 100 माइक्रोन से कम के बैन हैं। भीलवाड़ा में अधिकांश प्लास्टिक गुजरात से आता है। शहर में कई दुकानों पर प्लास्टिक आसानी से मिल जाती है।

ये होनी थी व्यवस्था

अगस्त 2021 में अधिसूचित नियम और 2022 के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक को समाप्त करने के प्रयास के तहत 31 दिसंबर 2022 तक प्लास्टिक कैरी बैग की न्यूनतम मोटाई को मौजूदा 75 से 120 माइक्रोन की जानी थी। प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाने, अवैध प्लास्टिक वस्तुओं के उत्पादन, आयात, वितरण, बिक्री रोकनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

शादी समारोह में नजर आती प्लास्टिक

एक शादी में कम से कम पांच हजार गिलास काम में आते हैं। हालांकि इन पर रोक है। शहर में करीब 10 हजार वैंडर हैं। इनके पास हर दिन एक किलो प्लास्टिक कैरी बैग आते हैं। वे सभी प्लास्टिक घरों में पहुंचने के बाद कचरे में आ रही है। शहर में 150 कचरा स्टैंड हैं। इन पर प्लास्टिक कैरी बैग नजर आएंगे। नगर परिषद व प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

समय-समय पर कार्रवाई

शहर में समय-समय पर प्लास्टिक कैरी बैग जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।

- हेमाराम चौधरी, आयुक्त नगर परिषद