
Doctor and lack of resources in Mahatma Gandhi Hospital in bhilwara
भीलवाड़ा।
जिले के सबसे बड़े सरकारी महात्मा गांधी अस्पताल में मरीज भर्ती होने से कतराने लगे हैं। भर्ती हो भी गए तो इलाज बीच में छोड़कर भाग रहे हैं। इसकी मुख्य वजह अस्पताल में डॉक्टर और संसाधनों का अभाव होना है। बीते 16 माह के आंकड़ों को देखे तो जिला अस्पताल में 9 हजार मरीज भर्ती होने के बाद बीच में इलाज छोड़कर चले गए।
उन्होंने डॉक्टर या नर्सिंग स्टॉफ को भी बताना मुनासिब नहीं समझा कि वे क्यों जा रहे हैं। वहीं 1700 मरीज लिखकर चले गए कि हमें यहां इलाज नहीं कराना है। राजस्थान पत्रिका ने एमजीएच में मरीजों से बात की तो सामने आया कि आधे से ज्यादा मरीज यहां की सेवा से संतुष्ट नहीं है। राज्य सरकार से इलाज व अधिकांश जांचें नि:शुल्क होने के बावजूद मरीज टिक नहीं पा रहे है।
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आउटडोर में हालत खराब ही है, लेकिन इनडोर में भी काफी अव्यवस्था है। 10 से 15 फीसदी मरीज अव्यवस्था के चलते बिना बताए वार्ड छोड़कर चले जाते हैं। जानकारों के अनुसार, अस्पताल में रोक के बावजूद निजी एम्बुलेंस संचालक अंदर घूमते हैं। वे मरीजों के परिजनों को यहां सुविधाओं का अभाव बताकर गुमराह करते हैं और निजी अस्पतालों में जाने को प्रेरित करते हैं। अस्पताल में कमीशनखोर गिरोह भी सक्रिय है। वे भी मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों में जाने को बरगलाते है। इसके बदले निजी अस्पताल उन्हें अच्छा कमीशन देते हैं।
ये कहते है आंकड़े
जनवरी 2017 से अप्रेल 2018 तक 81,717 मरीज भर्ती हुए। 9,103बिना बताए गए तो 1,712ने डॉक्टरों से कहा-हमें यहां इलाज नहीं कराना।
...तो सुधार करेंगे
मरीज बीच में क्यों चले जाते हैं, इस बारे में कुछ कह नहीं सकते। यहां व्यवस्था सही है पर कई बार मरीज डॉक्टर का इंतजार नहीं करता व बिना डिस्चार्ज चला जाता है। कमी है तो व्यवस्था सुधारेंगे।
डा. एसपी आगीवाल, पीएमओ
Published on:
21 May 2018 11:53 am
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