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छह माह के भतीजे की हत्या की, उम्रकैद की सजा मिलने पर भी बेशर्मी से हंसता रहा हत्यारा

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Eklavya Murder case

एकलव्य हत्याकांड: बेटे के कातिल को सजा से मिला सुकून, आठ साल बाद अब चैन की नींद सोएगा परिवार

भीलवाड़ा।

मासूम बेटे को गोद से लेकर गए कातिलों के मनसूबों पहचान नहीं सकी थी। अपहरण के बाद उसकी हत्या का पता लगा तो कलेजा फट गया। यकीन नहीं हो रहा था कि गोद में खेलते मासूम की हंसी को दरिंदों ने पलभर में छीन लिया। आठ साल तिल-तिल कर मरती रही। अब फैसला आया तो कातिलों को सजा के बाद सुकून आया है। अब परिवार को चैन की नींद आएगी। यह कहना था कि एकलव्य की मां रेणू का।

मां बोली-मेरा नहीं, शहर का बेटा हो गया था

अभियुक्तों को सजा का पता लगते ही रेणू फफक पड़ी। कहा, एकलव्य मेरा नहीं, शहर का बेटा हो गया। बच्चे के मौत पर हर आंख रोई थी। तब परिवार के साथ शहर आकर खड़ा हो गया था। अब सजा के बाद मेरे बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। गिरफ्तारी से सजा तक सबके सहयोग के लिए भीलवाड़ा का शुक्रिया क हूंगी। अभियुक्तों को सजा से एकलव्य के घर में खुशी का माहौल है। मालूम हो, अपर सेशन न्यायालय संख्या तीन ने चर्चित एकलव्य हत्याकाण्ड में आरसी व्यास कॉलोनी के ओमप्रकाश शर्मा, सुभाषनगर के कुलदीपसिंह को उम्रकैद व पालड़ी के अविनाश लुहार को सात साल की सजा सुनाई।

हर पेशी पर जाते पिता

एकलव्य के पिता पंकज ने कहना था कि न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था। पेशी के दौरान अभियुक्त आए या ना आए। वह जरूर अदालत जाते थे। बयान से बहस तक सुनी।

हंसता रहा हत्यारा

एकलव्य के पिता पंकज के बुआ का बेटा व मुख्य अभियुक्त ओमप्रकाश को चेहरे पर सजा के बाद भी शिकन तक नजर नहीं आई। चालानी गार्ड सजा सुनाए जाने के बाद लेकर रवाना हुए तो उसके चेहरे पर हल्की मुस्कराहट थी। मुख्य अभियुक्त ओमप्रकाश ममेरे भाई पंकज से द्वेषता रखता था। पंकज सक्षम परिवार से थे। उनका रहन-सहन ओमप्रकाश को अखरता था। ईष्या के कारण उसने वारदात की।