9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

परीक्षा सिर पर और शिक्षकों को ‘ट्रेनिंग’ का फरमान, कैसे पूरा होगा कोर्स?

- विभागीय विरोधाभास: निदेशालय ने 31 जनवरी तक पाठ्यक्रम पूरा करने के दिए निर्देश - विज्ञान-गणित शिक्षकों को तीन दिन का प्रशिक्षण

2 min read
Google source verification
Exams are just around the corner, and teachers have been ordered to attend 'training' sessions.

Exams are just around the corner, and teachers have been ordered to attend 'training' sessions.

भीलवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों में इन दिनों गुरुजी 'दोहरे दबाव' में हैं। एक तरफ माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बोर्ड परीक्षाओं और सत्र को पटरी पर लाने के लिए 31 जनवरी तक हर हाल में सिलेबस पूरा करने की समय सीमा तय कर दी है, तो दूसरी तरफ विभाग ने विज्ञान और गणित जैसे कठिन विषयों के शिक्षकों को कक्षाओं से हटाकर ट्रेनिंग देने का फरमान जारी कर दिया है। परीक्षाओं के ठीक पहले आए इन आदेशों ने शिक्षकों और विद्यार्थियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि यह प्रशिक्षण ब्लॉक स्तर होने हैं यह भी 15 जनवरी तक करवाने हैं।

गणित बिगड़ा: शेष रहे महज 18 कार्यदिवस

इस बार नया सत्र 1 अप्रेल से शुरू करने की तैयारी है, जिसके कारण परीक्षाएं एक माह पहले प्रस्तावित हैं। शिक्षकों का कहना है कि 31 जनवरी की डेडलाइन में से 3 रविवार और 3 दिन के इस प्रशिक्षण को हटा दिया जाए, तो पढ़ाने के लिए केवल 18 दिन ही बचते हैं। इतने कम समय में भारी-भरकम पाठ्यक्रम पूरा करना मुश्किल होगा। रहा है।

स्टेम प्रशिक्षण: 15 जनवरी तक कार्यशाला

शिक्षा अधिकारी की ओर से जिले के विज्ञान और गणित शिक्षकों को 'स्टेम शिक्षा' आधारित क्षमता संवर्धन के लिए 15 जनवरी तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण में उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं। यह प्रशिक्षण ब्लॉक स्तर पर होगा।

शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के प्रदेश अध्यक्ष नीरज शर्मा का तर्क है कि वे प्रशिक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन समय का चयन गलत है। विज्ञान-गणित के पद पहले से रिक्त हैं, जो शिक्षक हैं उन्हें भी हटाने से पढ़ाई ठप होगी।

पत्रिका व्यू: पढ़ाई के 'प्रयोग' में न पिस जाए छात्र

विभाग एक तरफ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समय पर कोर्स की बात करता है, वहीं दूसरी ओर 'पीक टाइम' में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक और प्रशिक्षण कार्यों में झोंक देता है। विज्ञान और गणित जैसे विषयों में एक दिन की क्लास छूटने का मतलब है विद्यार्थी का बड़ा नुकसान। प्रशासन को चाहिए कि वह प्रशिक्षण की तारीखों पर पुनर्विचार करे।