
मेजा बांध को लेकर आयोजित किसानों की बैठक में हंगामा करते किसान
भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी की जीवन रेखा कहलाने वाले मेजा बांध का पानी सिंचाई के लिए छोडऩे को लेकर मंगलवार को हुई किसानों की बैठक हंगामेदार रही। दो घण्टे तक चले हंगामे के बीच किसानों ने जल संसाधन विभाग (सिंचाई) और प्रशासन की जमकर खिंचाई की। क्षतिग्रस्त नहरों के लिए अफसरों को जिम्मेदार ठहराया। इस दौरान सफाई देने के लिए उठे जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंतों को किसानों ने बोलने ही नहीं दिया। आखिरकार उनको बिना सफाई दिए बगैर बीच में बैठना पड़ा। बैठक में बांध का दस फीट पानी पेयजल के लिए रिजर्व रखने और शेष पानी सिंचाई के लिए छोड़ देने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि इस समय बांध में साढ़े अठारह फीट पानी है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) लालाराम गूघरवाल की अध्यक्षता में सुबह सवा ग्यारह बजे सत्यम कॉप्लेक्स के सामने जल संसाधन विभाग के विश्रांति गृह में जल वितरण कमेटी की बैठक शुरू हुई। बैठक शुरू होते ही किसानों ने क्षतिग्रस्त नहरों पर हंगामा कर दिया। विभाग के सहायक अभियंता सुभाष भट्ट ने प्रस्ताव रखा तो किसान उन पर बरस पड़े। आरोप लगाया कि भट्ट ने कभी नहर पर जाकर देखा ही नहीं। एेसे में अब मरम्मत की किस बात की। किसानों ने कहा कि बारह महीने में नहरों को सहीं नहीं करा पाए। यहीं वजह है कि सिंचाई की नहर हो या फिर मेजा फीडर। विभागीय अधिकारियों के कारण पानी की बर्बादी हो रही।
जलदाय विभाग के लिए दस फीट पानी का मुद्दा उठा तो किसानों ने एक स्वर में कहा कि करोड़ों खर्च करके भैसरोडग़ढ़ से चम्बल का पानी प्यास बुझा रहा है तो बांध के पानी पर किसानों का हक क्यों मारा जा रहा। ककरोलिया घाटी के साथ अन्य पेयजल स्त्रोत है। एेसे में बांध का पूरा पानी सिंचाई के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।
फटकारा तो सफाई देने उठे, किसानों ने दुबारा बैठाया
अतिरिक्त जिला कलक्टर घूघरवाल ने जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता के ही प्रश्नों के जवाब देने पर आपत्ति जताई। उन्होंने बैठक में कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता जमील अख्तर को फटकारा और उनको किसानों के प्रश्नों का जवाब देने के लिए खड़ा किया। सफाई देने उठे जमील अख्तर की बातों से किसान और भड़क गए। उन्होंने हंगामा करते हुए उनको बोलने नहीं दिया और बैठा दिया।
पहले बाई नहर में तीन दिन के लिए छोड़ा जाएगा पानी
बांध में दस फीट पानी रिजर्व रखने का निर्णय लिया। वहीं बांध की बाई नहर को खोलकर बुधवार से उसमें पानी छोडऩे का फैसला किया। इसमें तीन दिन तक पानी छोड़ा जाएगी। इससे माण्डल और बनेड़ा क्षेत्र के किसान लाभांवित होंगे। उसके बाद दाई नहर खोली जाएगी। बैठक में सुवाणा प्रधान सरोज देवी गुर्जर, डेयरी चेयरमेन रामलाल जाट, उपखण्ड अधिकारी चिन्मय गोपाल, सीएल शर्मा, तहसीलदार अरूण जैन, जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता वीके गर्ग समेत कई लोग मौजूद थे।
Published on:
17 Oct 2017 07:56 pm

बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
