
First the three-member committee gives the green signal, then gravel mining leases will be given
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश में बजरी खनन की लीज के परीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का निर्देश दिया। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही बजरी खनन पट्टों को मंजूरी दी जा सकेगी। अब इस मामले पर चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव व न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित की खंडपीठ ने डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान भीलवाड़ा की जनहित याचिका पर आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेन्द्र लोढ़ा ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवम्बर 21 को सीइसी की सिफारिशों की पालना करते हुए खनन पट्टे जारी करने का आदेश दिया था। इसके अंतर्गत सभी वैधानिक मंजूरियों के बाद ही बजरी खनन पट्टे जारी किए जा सकते हैं। नदी में जहां पहले बजरी का खनन हो चुका, वहां अगले पांच साल तक खनन ब्लॉक नहीं बनाए जा सकते। खान विभाग सभी अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिलने के बाद बजरी खनन पट्टे जारी कर सकेगा। इसके अलावा बजरी ब्लॉक के लिए चिन्हित स्थान के बारे में यह भी आंकलन करना होगा कि वहां कितने टन बजरी प्रति वर्ष निकाली जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन पहलुओं पर निर्देश देने के बावजूद राज्य सरकार इनकी अनदेखी कर रही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया कि बजरी खनन को लेकर तीन वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी बनाई जाए, जो खनन लीज के मामले में यह परीक्षण करे कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना की जा रही है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कमेटी की हरी झंडी के बाद लीज जारी हो सकेगी।
Published on:
31 May 2025 08:41 am
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