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फर्जी दस्तावेज तैयार करने पर पांच साल की सजा

डोडा चूरा तस्करी के सात साल पुराने मामले में जीप के कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में सुनाई सजा

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विशिष्ट न्यायालय (एनडीपीएस मामलात) डोडा चूरा तस्करी के सात साल पुराने मामले में जीप के कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मंगलवार को एक आरोपित को दोषी मानते हुए पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।

भीलवाड़ा।

विशिष्ट न्यायालय (एनडीपीएस मामलात) डोडा चूरा तस्करी के सात साल पुराने मामले में जीप के कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मंगलवार को एक आरोपित को दोषी मानते हुए पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। वहीं 15 हजार रुपए जुर्माने के आदेश दिए। इस मामले में पूर्व में तीन जनों को सजा सुनाई जा चुकी है।

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विशिष्ट न्यायालय (एनडीपीएस मामलात) डोडा चूरा तस्करी के सात साल पुराने मामले में जीप के कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में सूरज कुण्ड (पुष्कर) निवासी महेन्द्रसिंह रावत को दोषी मानते पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। वहीं 15 हजार रुपए जुर्माने के आदेश दिए। इस मामले में पूर्व में तीन जनों को सजा सुनाई जा चुकी है। प्रकरण के अनुसार 11 सितम्बर 2010 को काछोला पुलिस को गश्त के दौरान दानजी का खेड़ा के निकट सड़क से नीचे जीप मिली। तलाशी पर उसमें 10 बोरों में 340 किलो डोडा चूरा भरा मिला। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया। जांच आगे बढ़ाई तो सामने आया कि जब्त जीप कन्हैया सिंह के नाम की पाई गई। पुलिस ने कन्हैया से पूछताछ की तो विक्रय इकरारनामा पेश किया। यह वाहन सुरेन्द्र उर्फ लाला को बेचना सामने आया। अनुसंधान अधिकारी ने सुरेन्द्र से पूछताछ की तो उसने बताया कि बेचान नाम पर उसके हस्ताक्षर नहीं है। एेसे में पुलिस ने हस्ताक्षर जांच के लिए एफएसएल भेजा। इसमें हस्ताक्षर सुरेन्द्र के नहीं पाए गए।

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पुलिस ने कन्हैया से दुबारा पूछताछ की तो उसने बताया कि बेचाननामे पर सुरेन्द्र के हस्ताक्षर अभियुक्त महेन्द्रसिंह ने किए थे। पुलिस ने बाद में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में महेन्द्र को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक प्रदीप अजमेरा ने अभियुक्त के खिलाफ गवाह व दस्तावेज अदालत में पेश किया।

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