
शहर में बड़ला चौराहे पर पाइप लाइन के लिए की गई खुदाई
भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी की महत्वकांशी चम्बल परियोजना का पानी शहर में आए हुए एक साल पूरा हो गया है, लेकिन आमजन को रोजाना पानी मिलने का सपना अब भी अधूरा ही है। अधिकारियों की लापरवाही की बदौलत शहर में पांतरे ही जलापूर्ति की जा रही है। जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी के सामने वर्ष-2017 में नए साल में रोज सप्लाई करने का वादा करने वाले अफसर वाहवाही लूट कर पानी देना भूल गए। इसका प्रमुख कारण परियोजना के तहत बनी नई टंकियों में से आधे से भी सप्लाई शुरू नहीं हुई। ना ही पूरी तरह से पम्पिंग स्टेशन शुरू हो पाए।
शहर में लाइनों को आपस में जोडऩे का काम अब भी ही चल रहा है। इसी लापरवाही को चम्बल परियोजना और जलदाय विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर डाल रहे है। सच यह है कि दोनों विभागों के जिम्मेदार अफसरों में तालमेल नहीं दिख रहा। गौरतलब है कि गत वर्ष अक्टूबर के अंतिम पखवाड़े में चम्बल का पानी भीलवाड़ा पहुंचा था।
24 टंकियां बनी, 14 ही चालू हुई
शहर में परियोजना के तहत 24 नई टंकियों का निर्माण कराया गया। इसमें से महज 14 से जलदाय विभाग सप्लाई कर पा रहा। जलदाय विभाग का कहना है कि परियोजना अधिकारियों ने नई टंकियों पर पम्प सेट चालू नहीं कर पाया। विभाग की लाइन से नई लाइन को जोडऩे से कुछ नहीं होगा। पम्प सेट स्थापित होने पर ही उससे सप्लाई हो पाएगी। जिन टंकियों से सप्लाई शुरू हुई वह भी विभाग के पम्प सेट से ही ही सप्लाई की जा रही है। उधर, शहर में ९ पम्पिंग स्टेशन बनाए गए। इनमें से पांच स्थानों पर पम्प चालू हो पाए।
जलदाय विभाग की लाइन के भरोसे सप्लाई
शहर में परियोजना के तहत करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर नई लाइनों का जाल बिछाया है। मुख्य रोड पर लाइन डालकर गलियों में जलदाय विभाग की लाइनों से जोड़ दिया। एेसे में परियोजना अधिकारी अब भी जलदाय विभाग की लाइन के भरोसे ही सप्लाई कर पा रहे है। सच्चाई यह है कि विभाग की लाइन तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी है। एेसे में प्रेशर के साथ पानी पहुंचाना सम्भव नहीं है।
निजी कॉलोनियां अब भी पानी को तरसी
शहर में बनी निजी कॉलोनियों तक चम्बल का पानी पहुंचा ही नहीं है। यहां अब तक लाइन डालने की योजना का ही परियोजना अधिकारी खाका नहीं खींच पाए। वह स्थानीय निकाय पर जिम्मेदारी डाल रहे है। परियोजना अधिकारियों का कहना है कि निकाय या कॉलोनी मालिक पाइप डालवा दे तो वह लाइन जोड़ देंगे।
शहर में पम्प सेट लगा रहे हैं। कुछ स्थानों पर शुरू कर दिए है। जो टंकियां तैयार हो गई और वहां पम्प सेट लग गए है। उनसे सप्लाई शुरू करवा दी गई है। सच यह है कि विभाग नलों पर टूटियां नहीं लगा पाया है। पानी व्यर्थ बहता है। जल्द ही रोजाना पर सप्लाई लेकर आ जाएंगे।
डीके मितल, अधीक्षण अभियंता, चम्बल परियोजना
Published on:
10 Oct 2017 06:44 pm
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