
ब्राह्मणों की सरेरी की हृदय विदारक घटना ने ग्रामीणों को हिला दिया। तालाब में डूबने से तीन बालकों मौत के बाद चारों ओर चित्कार सुनाई दे रही थी। मृतकों के घर के बाहर कोहराम मचा था। ढांढस बंधाने वाली महिलाएं भी आंसूओं का सैलाब नहीं रोक पा रही थी। पूरा गांव शोक में डूब गया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव गांव पहुंचे। उसके बाद प्रभाकर और कन्हैयालाल की एक साथ अर्थी उठी। दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

चिता से धुआं उठता देख मानो पूरा गांव रो पड़ा। सैकड़ों लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। रात को घरों में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों के अनुसार आकाश के पिता रतलाम में व्यापार करते है। घटना के समय वहीं थे। उनको सूचना दी गई। पिता के शाम तक नहीं पहुंच पाने से आकाश का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। उसका बुधवार को अंतिम संस्कार होगा।

हर साल ग्रामीण धर्मी तालाब पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। चार प्रतिमाओं का विसर्जन था। दोपहर तीन बजे शोभायात्रा शुरू होनी थी। इससे एक घंटे पहले 10-12 बालक गणेश की छोटी प्रतिमा ले तालाब पर पहुंच गए। तालाब में कीचड़ था। चारों के पैर फंस गए।

वहां से गुजर रहे घनश्याम शर्मा को कमलेश का हाथ दिखा। उसने तालाब में छलांग लगा कमलेश को निकाल लिया। वहां मौजूद अन्य बालकों ने कुछ साथियों के डूबने की बात कही तो घनश्याम गांव पहुंचा और लोगों को बुला लाया। लोगों ने बच्चों को तलाशा तो कुछ देर में तीन अन्य को भी निकाल लिया, लेकिन वे दम तोड़ चुके थे।

अविनाश व्यास के एक पुत्र और एक पुत्री है। प्रभाकर की मौत से परिवार सदमे में है। माता-पिता और बड़ी बहन बेसुध हो गए। कन्हैया व आकाश के परिजनों को भी ढांढस बंधाने वालों के कंधे कांप गए।

तीनों मृतक गांव के विवेकानंद उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते थे। प्रभाकर व आकाश आठवीं व कन्हैया छठी के छात्र थे। विधायक रामलाल गुर्जर, तहसीलदार रामनिवास मीणा अंतिम संस्कार में शामिल हुए।