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कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान करना पड़ा भगवान को

चतुर्मुखी पारसनाथ प्रतिमा को किया कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान

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God had to sit under the Kalpa Vriksha in bhilwara

God had to sit under the Kalpa Vriksha in bhilwara

भीलवाड़ा ।


दिगम्बर मुनि सुधासागर महाराज के निर्देशन में निर्मित दिगंबर जैन अजमेरा की गोट का बड़े मंदिर में बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया के सान्निध्य में चतुर्मुखी पारसनाथ भगवान की प्रतिमा को कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान किया गया। इससे पूर्व सुबह नित्य नियम पूजन के साथ निहाल अजमेरा, नरेश, मुकेश पाटोदी, रतनलाल सोनी, मेघराज, पवन कुमार कोठारी ने शान्तिधारा की व फिर शांति मंडल विधान किया। निर्मल लुहाडिया, चांदमल वेद, मोहनलाल गदिया, महेंद्र अजमेरा तथा सुरेश पाटनी ने कलश स्थापित किए। ट्यूबवेल का भूमि पूजन सोहन लाल भैंसा ने किया।


प्रदीप भैया ने बताया, प्रतिमा को वेदी में विराजमान किया। करीब साढ़े सात फीट पद्मासन चतुर्मुखी पारसनाथ की चारों प्रतिमा को नवनिर्मित मंदिर में 15 फीट ऊंचे तथा ९ गुना ९ फीट गोलाई में बने कल्पवृक्ष के नीचे कमल पर विराजमान किया। प्रतिमा स्थापित होने के साथ ही पूरा मंदिर नवकार महामंत्र से गूंज उठा। प्रदीप भैया का दावा है कि कल्पवृक्ष का यह जैन मंदिर राजस्थान में इकलौता है। वेदी प्रतिष्ठा मई में होगी। मंदिर के अग्रभाग में मान स्तंभ एवं औषधालय का काम भी शुरू होगा।