
Government imposed land tax on industrial and commercial land in bhilwara
भीलवाड़ा .
कोरोना वायरस के चलते देश भर में चल रहे लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार ने एक अप्रेल से १० हजार वर्ग मीटर से अधिक की जमीन पर भूमि कर लगा दिया है। यह टेक्स एक अप्रेल से लागू कर दिया गया है। आदेश के तहत १० हजार वर्ग मीटर तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन इससे अधिक जमीन पर २० पैसे से लेकर २१० रुपए वर्ग मीटर की दर से वार्षिक टैक्स चुकाना होगा। सरकार ने यह आदेश ३० मार्च को जारी किया है।
१० हजार वर्ग मीटर से अधिक पर टैक्स
- इण्डस्ट्रीयल २ रुपए
- कॉमर्शियल ३ रुपए
- लैड व जिंक १५ रुपए
- कॉपर व लैड १५ रुपए
- रॉक-पॉस्पेट २१० रुपए
- सीमेन्ट एसएमएस ग्रेड लाइम स्टोन ६ रुपए
- अन्य मेजर मिनरल ३ रुपए
- डोलामाइट, फेल्सफार व अन्य २ रुपए
- अन्य मेजर मिनरल ०.२० रुपए
यह टैक्स प्रति वर्ग मीटर की दर से लगेगा
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प्रोसेस व स्पिनिंग उद्योग पर पड़ेगा असर
सरकार के इस आदेश से भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग पर असर पड़ेगा। इसमे् मुख्य रूप से ४ बीघा जमीन से अधिक पर लगेगा। वीविंग उद्योग में कुछ बड़े इकाईयो, प्रोसेस हाउस तथा स्पिनिंग उद्योग पर प्रतिवर्ष २० हजार से एक लाख रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। जबकि औद्योगिक इकाईयां कृषि भूमि से औद्योगिक भूमि में रूपान्तरण के लिए रूपान्तरण शुल्क चुकाने के अतिरिक्त प्रतिवर्ष लीज राशि दे रही है। इसके अलावा अन्य कई कर औद्योगिक इकाईयों की ओर से चुकाए जा रहे हैं। खनिज इकाईयों की ओर से डेड रेन्ट व रॉयल्टी चुकाई जाती है। इसके बाद भी सरकार ने नया भूमि कर लगाया है। इससे उद्योगो पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। जबकि पूर्व में लैण्ड व बिल्डिंग टैक्स लगा हुआ था। जिसे समाप्त किया गया था। लेकिन अब पुन: लैण्ड टैक्स के रूप में नया कर लगाया गया है। यानी एक हटाकर दूसरे नया कर लगाना गया। इससे उद्योगों पर असर पड़ेगा।
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सुविधाओं का अभाव
राज्य में औद्योगिक विकास के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बावजूद भी मूलभूत सुविधाओं का काफी अभाव है। राज्य का बहुत बड़ा भाग रेलवे सुविधाओं से वंचित है। निर्यात के लिए माल भेजने के लिए कई बड़े औद्योगिक केन्द्रों पर इंडलैंड कंटेनर डीपो व अन्य सुविधाओं का अभाव है। औद्योगिक इकाईयों के लिए विद्युत दरें राजस्थान में पड़ोसी राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश के मुकाबले काफी अधिक हैं। लैंडलोग्ड स्टेट होने से निर्यातकों को बन्दरगाहों तक माल भेजने के लिए अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ता है। जबकि भीलवाड़ा से १५ हजार करोड़ से अधिक का निर्यात हो रहा है।
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लॉकडाउन से पहले ही परेशानी
देश में लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में लम्बा समय लगेगा। उद्योगों को चलाना बहुत ही मुश्किल होगा। क्योंकि यहा से हजारों की संख्या मजदूर अपने गांव जा चुके है, ऐसे में उनका लौटना मुश्किल होगा। लॉकडाइन के कारण भुगतान का संकट बना हुआ है।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
लॉकडाउन के चलते सभी उद्योग बन्द है। पहले ही विश्व व्यापी मंदी की मार टेक्सटाइल उद्योग जेल रहा है। ऐसे में नया भूमि कर लगाने से उद्योगों पर आर्थिक भार पड़ेगा। इस कर को हटा कर उद्योगों को राहत दे। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स
Published on:
06 Apr 2020 08:04 am
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