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प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब मिलेगा अपना ‘मालिकाना हक’

- शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: पट्टा विहीन स्कूलों के लिए चलेगा विशेष अभियान

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Government schools in the state will now get their own 'ownership rights'.

Government schools in the state will now get their own 'ownership rights'.

राजस्थान के सरकारी विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और उन्हें कानूनी पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सैकड़ों सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय, जो दशकों से बिना पट्टे के संचालित हो रहे, उन्हें मालिकाना हक दिलाने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों को 'अति आवश्यक' निर्देश जारी किए हैं।

दो दिन में देनी होगी स्कूलों की कुंडली

निदेशक, माध्यमिक शिक्षा ने सख्त निर्देश दिए हैं कि माध्यमिक शिक्षा के तहत आने वाले ऐसे स्कूल जिनके पास भूमि का पट्टा नहीं है, उनकी सूची आगामी दो कार्य दिवस में उपलब्ध करानी होगी। यह जानकारी जिला और ब्लॉकवार निर्धारित प्रारूप में ईमेल के जरिए भेजनी अनिवार्य है।अभियान के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के स्कूलों को कवर किया जाएगा। इसमें राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय शामिल है।

क्यों जरूरी है पट्टा

सरकारी स्कूलों के पास पट्टा होने से न केवल उनकी भूमि सुरक्षित होगी, बल्कि भविष्य में भामाशाहों के सहयोग, सीएसआर फंड और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। वर्तमान में कई स्कूल भूमि विवाद या दस्तावेजों की कमी के कारण विकास कार्यों से वंचित रह जाते हैं।

स्कूलों के विकास की राह खुलेगी

राज्य सरकार की मंशा है कि संपूर्ण प्रदेश में पट्टा विहीन राजकीय विद्यालयों को अभियान चलाकर मालिकाना हक दिलाया जाए। इससे स्कूलों के विकास की राह खुलेगी।

अनुसूईया, संयुक्त निदेशक (प्रशासन)