
The completion of two years of the government's term has revived hopes for the bicycle project.
देश में बालिका शिक्षा को पंख लगाने वाली 'साइकिल वितरण योजना' इस बार प्रशासनिक सुस्ती और देरी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले में आधा शैक्षणिक सत्र बीत चुका है, लेकिन नवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली 15 हजार से अधिक छात्राएं आज भी पैदल ही स्कूल का सफर तय कर रही हैं। अब राज्य सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साइकिल वितरण की सुगबुगाहट तो शुरू होू गई है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान।
जिले में कुल 15 हजार 365 बालिकाओं को साइकिलों का इंतजार है, लेकिन 18 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित जिला स्तरीय समारोह में महज 1491 साइकिलों का ही वितरण किया जाएगा। यह वितरण शाहपुरा स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय तहनाल गेट में होगा। फिलहाल वहां के बैडमिंटन हॉल में युद्धस्तर पर साइकिलें फिट की जा रही हैं। एक सरकारी स्कूल की छात्रा का कहना था कि साइकिल नहीं होने से गांव-ढाणियों से आने वाली छात्राओं को भारी परेशानी हो रही है। सरकार को बेटियों के सफर को सुगम बनाने के लिए उत्सव का इंतजार करने के बजाय सत्र की शुरुआत में ही वितरण करना चाहिए।
आंकड़ों का खेल: जिले की शेष 13 हजार 874 बालिकाओं को साइकिल कब मिलेगी, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
सर्वे में देरी: हर साल अगस्त-सितंबर में नामांकन सूचना मांग ली जाती थी, लेकिन इस बार दिसंबर आधा बीतने के बाद भी प्रक्रिया कछुआ चाल चल रही है।
दूध भी बंद: छात्राओं का कहना है कि न साइकिल मिल रही है और न ही स्कूलों में मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के तहत दूध मिल रहा है।
प्रदेशभर में शिक्षा विभाग ने कुल 3.35 लाख से अधिक साइकिलों के वितरण का खाका तैयार किया है। 18 दिसंबर को सरकार की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर कुछ जिलों में प्रभारी मंत्रियों की मौजूदगी में प्रतीकात्मक वितरण समारोह आयोजित किए जाएंगे।
सरकार उत्सव मनाने की तैयारी में है, लेकिन धरातल पर आधी से ज्यादा बेटियां अब भी ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलने को मजबूर हैं। सत्र खत्म होने की ओर है, ऐसे में देरी से मिलने वाली ये साइकिलें छात्राओं के शैक्षणिक सत्र में कितनी मददगार साबित होंगी, यह बड़ा सवाल है।
Published on:
17 Dec 2025 09:24 am
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