14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरपंचों की नहीं, जनता की समस्या सुनने आया हूं

जहाजपुर। भीलवाड़ा जिला कलक्टर राजेन्द्र भटट ने जहाजपर पंचायत समिति सभागार में मंगलवार रात चौपाल लगाई। जैसे —तैसे लोगों को जानकारी हुई तो गिनती के लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। चौपाल में पर्याप्त संख्या में लोगों के नहीं पहुंचने व प्रचार—प्रसार समुचित नहीं होने पर कलक्टर ने नाराजगी दिखाई। I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches

less than 1 minute read
Google source verification
I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches

I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches

जहाजपुर। भीलवाड़ा जिला कलक्टर राजेन्द्र भटट ने जहाजपर पंचायत समिति सभागार में मंगलवार रात चौपाल लगाई। जैसे —तैसे लोगों को जानकारी हुई तो गिनती के लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। ब्लॉक की सडकों की हालत पर जिला कलक्टर ने सार्वजनिक विभाग के अधिशासी अधिकारी एसपी काबरा को लताड पिलाई।

लोगों ने भी सब्जी मण्डी का स्थान तय करने की मांग की। जिला कलक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों को शिकायतों का निस्तारण एक माह में करने के निर्देश दिए। I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches

सरसिया सरपंच खेमराज मीणा ने सरसिया से मीडिया तक सडक निर्माण का मुददा उठाया। प्रधान शिवजीराम मीणा ने सूचना के अभाव में लोगों के नहीं पहुंच पाने पर लोगों की समस्याएं स्वयं ही लिख कर दीं। इसमें 148 डी नेशनल हाई वे सत्तूर वाया गुलाबपुरा निर्माण के दौरान गांव में जंक्शन नहीं बनाने का मामला उठाया। I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches

चौपाल की शुरुआत में सभागार के बीच कुर्सियों पर केवल अधिकारी ही बैठे हुए थे। दिनेश व खेमराज मीणा ने बिजली व सडक निर्माण के मुदृदे से चौपाल शुरू हुई। प्रचार प्रसार के अभाव में चौपाल में लोग नहीं पहुंच सके। कलक्टर ने उपखण्ड अधिकारी उम्मेद सिंह पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मैं सरपंचों की सुनने नहीं आया हूं। लोगों की समस्या सुनन के लिए आया हूं।

प्रधान शिवजीराम मीणा व प्रतिपक्ष नेता देवेन्द्र सिंह ने चौपाल में शामिल होने आए तब तक कलक्टर चौपाल निपटा कर निकल चुके थे। I have come to listen to the problems of the public, not the sarpanches