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इनकी जिंदगी में अब सुई धागा की तरह सब बढि़या है…

patrika.com/rajsthan news

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 In his life, now everything is like a needle yarn ...

In his life, now everything is like a needle yarn ...

भीलवाड़ा।

फिल्म सूई-धागा के मौजी और ममता के सपने काफी संघर्ष के बाद सच हुए। एेसा इसलिए हुआ, क्योंकि वे अपने सपनों को देखते रहे और बिना हार माने आगे बढ़े। एेसी ही कहानी शहर की कुछ महिलाओं की है। ये महिलाएं जरूरतमंद थी। इनके लिए परिवार चलाना मुश्किल था। भीलवाड़ा यूनाइटेड लेडीज सर्किल ९६ ने इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया। सिलाई प्रशिक्षण दिलाया और काम सीखने के बाद सिलाई मशीन भी दी। अब ये महिलाएं इतनी सक्षम हो चुकी हैं कि इनके यहां सब बढि़या चल रहा है। फिल्म में भी मौजी ने कठिनाइयों ने बावजूद हमेशा यही कहा, सब बढि़या है। शास्त्रीनगर निवासी सपना सोमानी ने इन्हें सिलाई सिखाई है। लेडीज सर्किल ने सौ से ज्यादा महिलाओं को यह प्रशिक्षण दिलाकर आत्मनिर्भर किया है। लेडीज सर्किल की चेयरपर्सन संध्या शर्मा, पूर्व चेयरपर्सन कृष्णा राठी का कहना है कि इन महिलाओं के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव आया है। ये अपने परिवारजनों के सहयोग के अलावा खुद भी घर चलाने में सक्षम हुई हैं।---------------------कभी नहीं मानी हारलेडीज सर्किल के प्रोजेक्ट में सिलाई सीख रही पूजा बैरवा ने बताया कि पहले कुछ भी नहीं आता था। हर दिन नया सीखने को मिला। खुद के पैरों पर खड़ी होकर कमाना चाहती हूं। प्रियंका वैष्णव ने बताया कि यहां सिलाई सीखी। कई नई डिजाइन के कपड़े बनाए, जो कई मार्केट में खूब पसंद आए।----------------स्वाभिमान से जीएं इसमें हमारी खुशीलेडीज सर्किल की ओर से सात-आठ सालों से इस तरह के प्रोजेक्ट चलाएं जा रहे हैं। इसमें स्त्री सहाय प्रोजेक्ट में सिलाई सिखाई जाती है। तीन माह के कोर्स में बुटिक डिजाइनर कोर्स भी है। महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही स्वाभिमान से जी रही हैं। लेडीज सर्किल की ओर से दीवाली धूम, नवरात्र डांडिया, किड्स कार्निवल आदि कार्यक्रम किए जाते हैं। इससे जो आर्थिक मदद मिलती है, उन्हें इस तरह के सेवा कार्यों में खर्च किया जाता है।---------२६ सदस्यों ने चला रखा प्रोजेक्ट चेयरपर्सन संध्या शर्मा ने बताया कि लेडीज सर्किल में अभी २६ सदस्य हैं। शिक्षा, चिकित्सा के कई प्रोजेक्ट हाथ में ले रखे हैं। पौधारोपण के साथ ही स्कूलों में कार्यक्रमों में भागीदारी निभाई जाती है। प्रोजेक्ट में नमिता बेसवाल, मीनल मुखिजा, निकिता पाटोदी, एकता लढ़ा, रश्मि गर्ग, राखी अग्रवाल आदि सहयोग कर रही हैं।