
Inaccessible and remote schools will be identified, teachers will get facilities
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत टास्क संख्या-140 की प्रभावी क्रियान्विति के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने सभी जिलों के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। जारी पत्र के अनुसार राज्य में दूरस्थ एवं दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों का चिन्हीकरण कर प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि दूरस्थ व कठिन पहुंच वाले विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों को विशेष आवास भत्ता एवं अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए ऐसे विद्यालयों की पहचान आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक जिले में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। समिति में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (समसा) एवं संबंधित ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। समिति की ओर से जिले के भौतिक एवं भौगोलिक हालात के आधार पर दुर्गम विद्यालयों का चिन्हीकरण किया जाएगा।
निर्देशों के अनुसार ऐसे विद्यालय, जो जिला मुख्यालय, उपखंड मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय या नगर निकाय से न्यूनतम 50 किलोमीटर दूर स्थित हैं, उन्हें प्राथमिकता से चिन्हित किया जाएगा। साथ ही जिन विद्यालयों तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग, पहाड़ी क्षेत्र, नदी-नाले या अन्य प्राकृतिक बाधाएं पार करनी पड़ती हैं, उन्हें भी सूची में शामिल किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में यह दूरी 20 किलोमीटर तक शिथिल की जा सकती है। ऐसे में भीलवाड़ा जिले के आसींद व बिजोलिया क्षेत्र में कुछ स्कूलों के नाम सामने आ सकते है। समिति की ओर से चिन्हित विद्यालयों की सूची का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा, ताकि वास्तविक परिस्थितियों का आंकलन हो सके।
जिला स्तरीय समिति की ओर से अनुमोदित सूची निर्धारित प्रारूप में एक्सेल शीट के माध्यम से 30 कार्य दिवस में निदेशालय को ई-मेल के जरिए भेजनी होगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वास्तविक रूप से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों को ही इस श्रेणी में शामिल किया जाए।
Published on:
21 Feb 2026 09:17 am
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