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जहाजपुर किला खो रहा अपनी पहचान

Jahazpur kila मेवाड़ की पहचान रखने वाला जहाजपुर का किला (दुर्ग) 70 फीसदी हिस्सा खण्डर में तब्दील हो रखा है। इस किले की देखरेख नहीं होने के कारण किले की दीवारें तथा भीतर बने कमरें क्षतिग्रस्त हो रखे हैं तथा कुछ दीवारें मलबे में तब्दील हो रखी है।

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जहाजपुर किला खो रहा अपनी पहचान

जहाजपुर किला खो रहा अपनी पहचान

मेवाड़ की पहचान रखने वाला जहाजपुर का किला (दुर्ग) 70 फीसदी हिस्सा खण्डर में तब्दील हो रखा है। इस किले की देखरेख नहीं होने के कारण किले की दीवारें तथा भीतर बने कमरें क्षतिग्रस्त हो रखे हैं तथा कुछ दीवारें मलबे में तब्दील हो रखी है।

आजादी के बाद राजाओं के दौर के अंतिम पडाव में राजा-महाराजाओं की विरासत अब सरकार के अधीन है। प्रशासन इस पर ध्यान दे तो यह दुर्ग अपने स्वरूप में लौट सकता है तथा पर्यटकों में अपनी पहचान बना सकता है।

किले की धरोहर पर एक नजर
शाहपुरा जिले के जहाजपुर कस्बे के प्राचीन एव एतिहासिक दुर्ग में प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश का छोटा सा मंदिर है। किले के भीतर प्रवेश पर सामने भगवान शिव सर्वेश्वर नाथ जी का मंदिर है। दुर्ग के मध्य पिताम्बर राॅय श्याम का मंदिर हैै। जिसके प्रति आज भी नगरवासियों की आज भी गहरी आस्था है। बुजुर्ग बताते हैं कि जलझूलनी एकादशी पर नगरवासी जल विहार के लिए सर्वप्रथम किले से भगवान पिताम्बर राॅय जी को गाजे बाजे के साथ नीचे लाते हैं, उसके बाद ही नगर की राम रेवाडियां नगर से होकर जल विहार को जाते हैं।

कुम्भा ने करवाई थी मरम्मत
जानकार बताते है कि किले की मरम्मत मध्यकालीन समय में अंतिम बार महाराणा कुम्भा ने करवाई थी। आजादी के बाद राजाओं के दौर के अंतिम पडाव में राजा-महाराजाओं की विरासत सरकार के अधीन चली गई। उसके बाद छोटे-मोटे दुर्ग जो राजस्व के लिहाज से पिछडे हुए थे इन पर ध्यान नहीं दिया गया और वे खण्डर होते चले गए। जहाजपुर दुर्ग इनमें से एक है।

अकबर का भी रहा अधिकार
जहाजपुर किला सन् 1567 में अकबर के अधिकार में रहा। ्पांच वर्ष बाद राणा उदय सिंह के कनिष्ठ पुत्र जगमाल को यह किला जागीर के रूप में दिया गया। अठारहवीं शताब्दी में शाहपुरा के राजा के अधिकार में रहा। सन् 1806 में कोटा के जालिम सिंह झाला ने बलपूर्वक अपना स्वामित्व जमा लिया। किन्तु ब्रिटिश सरकार ने बीच बचाव कर 10 साल बाद 1816 में इसे महाराणा को लौटा दिया था। सन् 1820 में कर्नल जेम्स टाॅड इसी किले में रूके थे।