
चीन की चुनौती एवं स्वदेशी की प्रासंगिकता पर व्याख्यानमाला को संबोधित करते यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी
भीलवाड़ा।
हमारे देश का इतिहास किसी भी मायने में कमजोर नहीं है। यहां की वस्तुएं एवं निर्माण स्थाई है। विकट स्थिति में देशवासी चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर साथ देंगे तो पड़ोसी देश आर्थिक रूप से पिछड़ेगा। एेसे में भारत की प्रतिष्ठा विश्व में बढ़ेगी। यह बात प्रदेश के यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने गुरुवार रात नगर परिषद सभागार में जयदेव पाठक जनसेवा न्यास की ओर से जयदेव पाठक स्मृति दशम व्याख्यानमाला में चीन की चुनौती एवं स्वदेशी की प्रासंगिकता विषय पर कही।
उन्होंने कहा कि ताली बजाने से चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं होगा। संकल्प लेकर जाएं कि चीनी वस्तुओं को नहीं खरीदेंगे तथा अपनी संतानों को भी इससे दूर रखेंगे। चीन के देश विरोधी कृत्यों को देखते हुए हमें ऐसे देश की वस्तुओं व सामानों को नहीं खरीदना चाहिए, जो हमारे देश के विरुद्ध षडयंत्र रचता हो। मुख्य वक्ता पेसिफिक विश्वविद्यालय के कुलपति भगवती प्रसाद शर्मा ने कहा कि 72 दिन तनाव रहा तथा पूरे विश्व की नजर थी। इसमें चीन पर हमें मनोवैज्ञानिक जीत मिली है। सरकार ने राजनीतिक ढृढ़ता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि चीन ने हर मुद्दे पर हमारा अहित किया है, जबकि वो भारत में अपनी वस्तुएं बेच आर्थिक सशक्तिकरण कर रहा है।
हमें चीनी उत्पाद का विरोध करना चाहिए। व्याख्यानमाला के अध्यक्ष टेक्सटाइल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद चतुर्वेदी ने कहा कि चीन की नीति उपनिवेशवाद की है। इसने अपने देश को नुकसान ही पहुंचाया है। चीन की वस्तुओं को नहीं खरीदें। यहां विद्या भारती राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. दामोदर शर्मा व जन सेवा न्यास के अध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने विचार व्यक्त किए। विद्या भारती भीलवाड़ा के अध्यक्ष डॉ. रोशनलाल पीतलिया ने आभार जताया। व्याख्यानमाला में सांसद सुभाषचन्द्र बहेडिय़ा, नगर परिषद सभापति ललिता समदानी सहित प्रदेश से आए आचार्य व प्रधानाचार्य मौजूद थे। इस दौरान विद्या भारती के 9 आचार्य व 9 प्रधानाचार्य का सम्मान किया।
Updated on:
07 Sept 2017 10:56 pm
Published on:
07 Sept 2017 10:26 pm

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