
Jindras Panchayat ride two boats in bhilwara
भीलवाड़ा /मांडल।
पंचायत चुनाव से पूर्व राज्य सरकार के निर्देश पर पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों के किए जा रहे पुनर्गठन में भी जिन्द्रास ग्राम पंचायत की आस अटक गई है। यह पंचायत दो नावों की सवारी बन कर रह गई है। दरअसल, जिन्द्रास पंचायत मांडल व आसीन्द उपखंड दोनों में आती है। इसके चलते विकास भी नहीं हो पा रहा है। यह पंचायत दो उपखंडों में भले ही बंटी हुई है, लेकिन इसके पांचों गांव विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं।
पंचायत के पांच गांवों में से तीन मांडल तहसील हैं, जबकि दो गांव आसींद उपखंड में हैं। इसके चलते चार हजार की आबादी वाली पंचायत विकास के मामले में पिछड़ी हुई है। ग्रामीणों को भी कई परेशानियां उठानी पड़ती है। जिन्द्रास के चारों तरफ के गांव भी मांडल उपखंड में हैं।
सड़क नहीं जुड़ी पंचायत
पंचायत जिला मुख्यालय तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ी हुई है। पंचायत मुख्यालय जिंद्रास में बस नहीं चलती। ग्रामीणों को निजी वाहनों या पैदल आना-जाना पड़ता है।
आसींद में थी
पूर्व में पंचायत से जुड़ी पांच ढाणियां जिंद्रास, जालरिया, जोरावरपुरा, मालनाथ, सोजी का खेड़ा व दो मजरे माधुबा का खेड़ा, लोला का खेड़ा आसीन्द तहसील क्षेत्र में आते थे। वर्तमान में राजस्व ग्राम जिंद्रास, जालरिया, जोरावरपुरा मांडल उपखंड में हैं, जबकि मालनाथ, सोजी का खेड़ा व दो मजरे माधुबा का खेड़ा, लोला का खेड़ा आसीन्द में हैं।
एक हो उपखंड
जिन्द्रास पंचायत विकास में पिछड़ गई है। अधिकारियों व राजनेताओं को अवगत कराया, लेकिन समस्या जस की तस है। पंचायत दो उपखंड में होने से परेशानी होती है। किसी एक उपखंड से जोड़े तो विकास हो।
- कमलेश कंवर, सरंपच, जिंद्रास
लिया था प्रस्ताव
पंचायत को मांडल से जोडऩे के लिए प्रस्ताव लिया था, लेकिन आसींद में भी अलग से पंचायत समिति बनाने के कारण उसको छोड़ दिया। वहां पर अलग से पंचायत समिति नहीं बनती है, तो मांडल में जोडऩे के प्रयास करेंगे।
बीरबलसिंह जानू, विकास अधिकारी, मांडल
नहीं किया बदलाव
विधानसभा क्षेत्र से जुड़े गांवों को अन्य विधानसभा में शामिल करना अधिकारी क्षेत्र में नहीं है। पंचायत क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमित जैन, विकास अधिकारी, आसीन्द
Published on:
07 Jul 2019 02:58 pm
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