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संयम पथ पर लक्की व नूपुर ने रखे कदम, बनी साध्वी

राजस्थान में आयोजित जैन भगवती दीक्षा समारोह में बैंगलुरु की मुमुक्षु लक्की सुराणा को लोकोत्तर श्री व नौखा की नुपुर भूरा को निर्ग्रंथ श्री नाम दिया गया है। यह दोनों ही अब जैन साध्वी बन गई है। sanyam path par lakkee and noopur ne rakhe kadam, banee saadhvee

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संयम पथ पर लक्की व नूपुर ने रखे कदम, बनी साध्वी

संयम पथ पर लक्की व नूपुर ने रखे कदम, बनी साध्वी

राजस्थान में आयोजित जैन भगवती दीक्षा समारोह में बैंगलुरु की मुमुक्षु लक्की सुराणा को लोकोत्तर श्री व नौखा की नुपुर भूरा को निर्ग्रंथ श्री नाम दिया गया है। यह दोनों ही अब जैन साध्वी बन गई है। चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ीसादड़ी में कई दिनों से एक की ही दीक्षा की तैयारियां चल रही थी। दूसरी मुमुक्षु गुप्त रूप से सामने आई और साध्वी बनी। यह करीब साढ़े तीन साल पहले मुमुक्षु बनी थी और आचार्य रामलालजी महाराज के सांसारिक परिवार से है। Lucky and Nupur became Sadhvi

अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य रामलाल महाराज ने गुरुवार को नगर में दो युवतियों को जैन भगवती दीक्षा प्रदान करते हुए धर्मसभा में अपने विचार व्यक्त किए। जैनाचार्य ने कहा कि पथ जीवन को संवारने वाला पथ है, लेकिन यह बहुत कठिन मार्ग है। यह धर्म का मार्ग है और धर्म के माध्यम से संसार के लोगों को सुख देना है, उनकी पीड़ा को दूर कर मन की प्रसन्नता बनी रहे यह कार्य करना है। प्रशंसा की चाहत नहीं होनी चाहिए। कान अपनी तारीफ सुनने लिए न हो। मन में कर्ता भाव न हो। तब ही संयम पथ पर धर्म की ओर अग्रसर होना होगा।

आचार्य नेे कहा कि वासना, लोभ, मोह, मान, माया से पार पाना है। बगैर धर्म की इच्छा से यह सम्भव नहीं है। साधु जीवन स्वीकार करना आसान है पर उसका पालन करना कठिन है। संयम पथ पर धर्म और सत्य एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते हैं। दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनना पड़ता है।

उपाध्याय राजेश मुनि ने कहा कि संयम का मार्ग सेवक बनाता है राजा नहीं और अनुचर बनकर पूजा भक्ति करने का मार्ग है। अंतर्मन में एक ही बात रखनी है कि कोई आपको महत्व दे आपका ध्यान रखे इसकी कोई जरूरत नहीं। आपका काम साध्वी बनकर श्रावक श्राविकाओं को साता पहुंचाना है। अपनी साता की इच्छा रखने का भाव मन को शांत नहीं होने देता है। साधु, साध्वी बनने का सीधा अर्थ है अपने को तन, मन, आत्मा सहित आध्यात्मिक मार्ग पर समर्पण करना। सच्चा सुख सेवक बनने में ही है। इस अवसर पर साध्वी प्रेमलता श्री व प्रसिद्धि श्री ने विचार व्यक्त किए।

समारोह में सांसद व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, जिलाध्यक्ष गौतम दक, विधायक ललित ओस्तवाल, अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम रांका, महामंत्री निश्चलय कांकरिया, उमरावसिंह ओस्तवाल, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा, पालिका अध्यक्ष विनोद कंठालिया, दीक्षार्थी लक्की के माता मधु, पिता राजेन्द्र सुराणा, नुपुर के माता चंदा देवी, पिता आनंदमल भूरा, साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र मेहता ने विचार व्यक्त किए।

आयोजन में दीक्षा से पूर्व दोनों ही मुमुक्षुओं के परिवार जनों व सम्पूर्ण जन समुदाय से सार्वजनिक रूप से दोनों को साध्वी के रूप में दीक्षा प्रदान करने की सहमति ली। इस पर सभी ने एक स्वर में हाथ खड़े कर हर्ष हर्ष जय जय कर सहमति प्रदान की।

गत 28 मई को कानोड़ में दीक्षा ग्रहण कर साध्वी बनी निरामया श्री को भी यहां आचार्य श्री ने बड़ी दीक्षा प्रदान की। इससे नव दीक्षित साध्वी का प्रशिक्षण कार्यकाल पूरा हो गया है। अब वे अन्य साध्वियों की तरह विचरण कर सकेंगी।