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62 के युद्ध के शहीद को न्याय की प्रतीक्षा, परिजन अब भी वंचित, अनुकम्पा नियुक्ति व कृषि भूमि से

- भारत-चीन युद्ध 1962 के शहीद मीणा के परिजनों को न्याय की प्रतीक्षा, विभागीय लापरवाही से बढ़ी पीड़ा - लुहारिया के मीणा बलिदान को 63 वर्ष, परिवार को अब तक नहीं मिली सहायता, भटक रहा न्याय के लिए

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Martyr of 1962 war awaits justice

Martyr of 1962 war awaits justice

भारत-चीन युद्ध 1962 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद रामकिशन सिंह मीणा (पायनियर कोर) के परिवार को आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी न्याय नहीं मिला। शहीद के परिजनों को कृषि योग्य भूमि आवंटन और अनुकम्पा नियुक्ति जैसी सरकारी सुविधाओं से आज भी वंचित है। शहीद मीणा जहाजपुर तहसील के लुहारीकलां निवासी है। वे 21 नवम्बर 1962 को भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।

कई बार गुहार, फिर भी सुनवाई नहीं

शहीद के भतीजे रामराज मीणा ने बताया कि परिवार ने निदेशक सैनिक कल्याण विभाग जयपुर, जिला सैनिक कल्याण कार्यालय भीलवाड़ा तथा उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर अनुकम्पा नियुक्ति एवं कृषि भूमि आवंटन की मांग की है। लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। मीणा का कहना है कि अधिकारियों ने शहीद परिवार के विरुद्ध गलत तथ्य प्रस्तुत कर उच्चाधिकारियों को गुमराह किया है। न्याय की उम्मीद में रामराज मीणा ने जिला कलक्टर को पत्र लिखा है।

नहीं हुआ भूमि आवंटन

तहसीलदार जहाजपुर की ओर से 28 अगस्त 2024 को जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा कि शहीद के परिवार को अब तक कृषि भूमि आवंटित नहीं की गई है। भूमि की अनुपलब्धता के कारण पत्रावली को संभागीय आयुक्त अजमेर के माध्यम से जिला कलक्टर टोंक को भेजा गया है। इसके बावजूद आज तक न तो भूमि आवंटित हुई और न ही परिवार को किसी तरह की सहायता प्राप्त हुई है।

परिवार में अब सिर्फ एक योग्य आश्रित

शहीद के तीन भाई थे मांगीलाल (जिनका निधन 1999 में हो गया), औंकार (अविवाहित व शारीरिक रूप से अक्षम), और गंगाराम। गंगाराम के पुत्र रामराज मीणा का पुत्र मोहित मीणा वर्तमान में परिवार का एकमात्र योग्य आश्रित है, जो अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र है। रामराज ने इसके लिए सैनिक कल्याण विभाग जयपुर में आवेदन कर रखा है, लेकिन प्रक्रिया लंबित है। हालांकि नियमानुसार शहीद के परिवार का सदस्य या फिर उसके भाई को नियुक्ति मिल सकती है। जबकि रामराज मीणा शहीद के भाई का लड़का है यानी व भतीजा है।

जमीन के लिए यह है नियम

जिला सैनिक कल्याण विभाग के अनुसार भारत-चीन व भारत-पाक युद्ध के दौरान भीलवाड़ा जिले से चार जने शहीद हुए थे। उनसे तीन को जमीन मिल चुकी है। लेकिन शहीद रामकिशन को जमीन क्यों नहीं मिली यह जांच का विषय है। ऐसे भी सरकार के नियमों के अनुसार 25 बीघा जमीन का पहला हकदार शहीद की पत्नी या पुत्र होता है। शहीद रामकिशन अविवाहित था। ऐसे में उसके माता- पिता इसके हकदार है। लेकिन वे आज जीवित नहीं है।

निदेशक को लिखा है पत्र

जमीन के मामले को लेकर सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक को 22 अप्रेल 2025 को पत्र लिखा है। वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कर्नल (रिटायर्ड) उदयसिंह सोलंकी, जिला सैनिक अधिकारी भीलवाड़ा