
कुत्ता नर या मादा, पालतू हैं या आवारा, अब शिक्षक रखेंगे हिसाब ( प्रतीकात्मक फोटो )
सुप्रीम कोर्ट के आवारा श्वानों को नियंत्रित करने के आदेश की आड़ में भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा कस्बे में नगर पालिका की लापरवाही और क्रूरता सामने आई है। पालिका की ओर से चलाए गए श्वानपकड़ने के अभियान में दो मासूम श्वानों की जान चली गई। वायरल वीडियो ने पालिका कर्मियों की बेरहमी को उजागर कर दिया। इसके बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे और पालिका को ‘नरकपालिका’ तक कह डाला।
वायरल वीडियो में दिखा कि पालिका कर्मी ने एक श्वान के गले में रस्सी का फंदा डाल दिया। खींचतान के दौरान श्वान के मुंह से खून निकलने लगा। कर्मी ने ट्रैक्टर की ट्रॉली पर लगे 7 फीट ऊंचे पिंजरे में श्वान को रस्सी से लटकाकर डालने का प्रयास किया। छटपटाहट के बीच श्वान फंदे से ही फांसी पर झूल गया और दम तोड़ दिया। इसी तरह की प्रक्रिया में एक और श्वान की भी मौत हो गई।
नगरवासियों ने पालिका प्रशासन पर मानवता और मापदंडों की अनदेखी का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि केवल मानसिक रूप से अस्वस्थ श्वानों को ही पकड़ा जाना चाहिए। पकड़े गए श्वानों को जंगल में छोड़ने की पालिका की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए, क्योंकि इससे वे भूख से मर सकते हैं। लोगों ने कहा कि जीवों के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही की कमी से यह घटना घटी है।
नगर पालिका की अधिकारी रिंकल गुप्ता ने स्वीकार किया कि गलती हुई है। उन्होंने श्वानपकड़ने वाले कर्मियों को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया और सख्त चेतावनी दी। साथ ही निर्देश दिए कि भविष्य में केवल मानवीय और सरल प्रक्रिया अपनाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्यों और स्थानीय निकायों को आवारा श्वानों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे। आदेश का मकसद नागरिकों की सुरक्षा के साथ ही श्वानों की देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना था। शाहपुरा में हुई घटना ने इस आदेश की आड़ में संवेदनहीनता को उजागर किया है।
Updated on:
25 Aug 2025 11:44 am
Published on:
23 Aug 2025 09:31 pm
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