
On the eve of Sheetala Saptami, chants of Bherunath resounded through the bullion market.
भीलवाड़ा के पुराने शहर के हृदय स्थल सर्राफा बाजार में मंगलवार रात आस्था, कला और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। शीतला सप्तमी की पूर्व संध्या पर भेरुनाथ के स्थान पर आयोजित पारंपरिक उत्सव में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार पद्मश्री जानकीलाल भांड ने 'भोपा' का स्वांग रचकर शहरवासियों को भाव-विभोर कर दिया। 350 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस विरासत को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
उत्सव के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भेरुनाथ के स्थान पर धोक लगाकर खुशहाली की कामना की। भक्ति के इस माहौल में उस वक्त उत्साह और बढ़ गया जब कलाकार पीरु एवं सोनू ने महिला वेष धारण कर शानदार नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। ढोल और झालर की थाप पर पूरी रात 'केसिया' के गीतों से रात्रि जागरण हुआ।
मुर्दाडोल समिति के अध्यक्ष लादूलाल भांड ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। केसरिया गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है। आयोजन को सफल बनाने में राजेश (लादू) कसारा, नरेश पाटोदिया, अंकुश जयसवाल, डालचंद जीनगर, विजय लढा, यशोवर्धन सेन, सुनील टिक्कीवाल और अर्जुन कसारा सहित कई शहरवासियों का सक्रिय योगदान रहा।
समिति अध्यक्ष ने बताया कि उत्सव का मुख्य आकर्षण बुधवार दोपहर 2:30 बजे देखने को मिलेगा। चित्तौड़ वाले की हवेली से 'जिंदामुर्दे' की अनूठी सवारी निकाली जाएगी। यात्रा का प्रस्थान चित्तौड़ वाले की हवेली से होगा। जो रेलवे स्टेशन, गोलप्याऊ चौराहा, भीमगंज थाना, सर्राफा बाजार, बड़े मंदिर के पीछे होते हुए बाहला स्थित निर्धारित स्थान पर पहुंच कर सम्पन्न होती है।
अंतिम यात्रा में शामिल लोग इस 'मुर्दे' को भागकर पकड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन वह किसी के हाथ नहीं आता। सबसे रोमांचक क्षण तब होता है जब बाहला में अंतिम संस्कार से ठीक पहले 'जिंदामुर्दा' अर्थी से उठकर भाग निकलता है।
Updated on:
10 Mar 2026 10:18 pm
Published on:
10 Mar 2026 10:18 pm
