
सरकार सड़क सुरक्षा सप्ताह मना रही है। अधिकारी सड़कों पर वाहनचालकों के सामने हाथ जोड़ रहे हैं। इस अभियान को महज दिखावटी बना दिया है
भीलवाड़ा।
सरकार सड़क सुरक्षा सप्ताह मना रही है। अधिकारी सड़कों पर वाहनचालकों के सामने हाथ जोड़ रहे हैं। इस अभियान को महज दिखावटी बना दिया है। इसके लिए सात दिन सड़कों पर पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी नजर आएंगे। परिवहन विभाग ने पुलिस नियत्रंण कक्ष के बाहर परंपरागत तरीके से टेंट में कुछ फोटो लगा रखे हैं। कहने को यह सब कुछ जागरुकता के लिए है लेकिन इसका असर नहीं है।
दरअसल दुर्घटना के कारणों पर पुलिस, परिवहन विभाग, प्रशासन, नगर परिषद सहित अन्य जिम्मेदार विभागों ने कभी तह तक जाने की कोशिश नहीं की। स्थिति यह है कि प्रशासन की लापरवाही से शहर में पग-पग पर खतरा है। यदि प्रशासन इन अभियान में दिखावा करने के बजाय इन्हीं को सुधार ले जो हादसे थम सकते हैं। शहर में क्या अव्यवस्थाएं है जो दुर्घटना का कारण बन रही है इस पर एक रिपोर्ट।
पार्र्किंग स्थलों पर हो गया अतिक्रमण
हालात-शहर में पार्र्किंग स्थलों पर अतिक्रमण हो गया है। कहीं ठेले खड़े हैं तो कहीं केबिने रख दी गई है। इससे वाहनों को खड़ा करने की जगह नहीं मिलती है। स्थिति यह है कि बाजार में जगह नहीं मिलने से लोग सड़कों पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं। इससे भी हादसे होते हैं।
गायों का नहीं रखवाला, बन रही हादसे का कारण
हालात-शहर की सड़कों पर गायों का जमावड़ा लगा रहता है। नगर परिषद इन्हें पकड़कर कायन हाउस ले जाती है लेकिन स्थाई समाधान नहीं निकला है। सड़कों पर गायें बैठी रहने से आए दिन दुर्घटनाएं होती है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। हाल ही में स्थाई लोक अदालत ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है।
अस्थाई अतिक्रमण से सड़कें छोटी
हालात-शहर की सड़कों पर अस्थाई अतिक्रमण हो गया है। नगर परिषद व यातायात पुलिस की अनदेखी से दुकानदारों ने बाहर दस से पंद्रह फीट तक कब्जा कर लिया है। इससे सड़कें छोटी हो गई है। एेसी स्थिति में आए दिन जाम लगता है और सड़कों पर दुर्घटनाएं होती है। जिम्मेदारों का इस पर ध्यान नहीं है।
सड़कों पर गड्ढे, मामूली चूके तो हादसा
हालात-शहर की सड़कों पर कई चैंबर खुले पड़े हैं। साथ ही कई कॉलोनियों में गड्ढे हैं। इन्हें सही करने के लिए नगर परिषद ने कभी अभियान नहीं चलाया। एेसी स्थिति में वाहनचालकों को समस्या होती है। स्थिति यह है कि गड्ढों पर मामूली ध्यान हटने से हादसा होना आम बात हो गई है।
पूरी नहीं जलती ट्रैफिक लाइट
हालात-शहर में कई चौराहों पर ट्रेफिक लाइट्स लगी है। इनमें से कुछ चौराहें पर लाइट्स जलती है। कई चौराहों पर तो इसकी शुरुआत ही नहीं हुई है। नगर परिषद चौराहा सहित कई जगह ट्रेफिक लाइट्स नहीं जली है। इससे भी वाहनचालकों को परेशानी होती है।
ओवरलोड वाहनों की नहीं हो रही जांच
शहर में ओवरलोड वाहनों की आवाजाही है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। इससे भी दुर्घटनाएं होती है। ऑटोचालकों की मनमानी है लेकिन यातायात पुलिस केवल दिखावटी कार्रवाई करती है। ऑटो चालकों ने मनमर्जी से स्टैंड बना रखे हैं।
ब्रेकर लगे घटिया, नहीं है जेब्रा लाइनिंग
हालात: शहर में नगर विकास न्यास ने हाल ही में स्पीड ब्रेकर लगाए हैं। यह इतने घटिया है कि लगाने के पंद्रह दिन में ही टूट गए है। अब इनमें से कीले निकलने से वाहनों के पहियों को नुकसान हो रहा है। चौराहों पर जेबरा लाइनिंग नहीं होने से भी दुर्घटना होती है। इस और किसी का ध्यान नहीं है।
मनमर्जी से खोद रहे सड़कें
हालात-शहर में सड़कों को खोदने के लिए कोई रोकटोक नहीं है। जिसकी भी मर्जी है वे सड़कों पर गड्ढ़े कर रहे हैं। इन गड्ढों को वापस नहीं भरने से दुर्घटना होती है। रोड कटिंग का पैसा लेने के बावजूद उसका पेचवर्क नहीं करने से यह समस्या होती है। शहर में रोडकटिंग के कारण परेशानी होती है।
कोर्ट-कलक्ट्रेट के बाहर भी जाम
हालात-जिला मजिस्ट्रेट ने कोर्ट व कलक्ट्रेट के बाहर नो व्हीकल जोन घोषित कर रखा है। इसके बावजूद वहां वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। स्थिति यह है कि सिटी मजिस्ट्रेट के आवास के बाहर भी कारें खड़ी रहती है। इस रोड पर इतने वाहन रहते हैं कि जाम लगने के साथ ही हादसे होते हैं।
यह है जिम्मेदार विभाग
पुलिस-शहर में पुलिस की ओर से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए जाते हैं। जबकि पुलिस चाहे तो लोगों को जागरुक करने के साथ ही समस्याओं का समाधान कर सकती है। शहर में इतनी समस्याएं है लेकिन पुलिस ने कभी इनमें अपने प्रयास नहीं दिखाएं है।
परिवहन-परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा मना रहा है लेकिन सुरक्षा कैसे होगी इसका विभाग के पास कोई प्लान नहीं है। विभाग केवल दिखावा कर रहा है। जबकि यातायात सलाहकार समिति की बैठक में जो निर्णय लिए गए है उनकी पालनाा अब तक विभाग ने ढंग से नहीं करवाई है।
नगर परिषद-शहर में जगह-जगह अतिक्रमण है। गड्ढे हैं और गायें है इसके बावजूद कोई देखने वाला नहीं है। नगर परिषद ने इसके लिए कभी पूरा अभियान नहीं चलाया है। इस कारण अतिक्रमणकारियों के हौंसले भी बुलंद है। इन समस्याओं का समाधान होने पर हादसे भी कम हो सकते हैं।
Published on:
26 Apr 2018 12:38 pm
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
