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एमजी अस्पताल में स्टाफ के व्यवहार से संतुष्ट नहीं जनता, मरीजों पर किए मोबाइल सर्वे में हुआ खुलासा

पैंतालीस फीसदी मरीज तो डॉक्टरों के कामकाज से भी खुश नहीं है

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महात्मा गांधी जिला अस्पताल की सेवाओं से जनता खुश नहीं है। यहां के स्टाफ का व्यवहार भी अच्छा नहीं है।

भीलवाड़ा।

महात्मा गांधी जिला अस्पताल की सेवाओं से जनता खुश नहीं है। यहां के स्टाफ का व्यवहार भी अच्छा नहीं है। पैंतालीस फीसदी मरीज तो डॉक्टरों के कामकाज से भी खुश नहीं है। ये खुलासा बीते दिनों किए गए एक ऑनलाइन सर्वे में हुआ। ये सर्वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से अस्पताल में आए मरीजों से मोबाइल पर बात कर किया गया था। अब मिशन की ओर से डॉक्टरों और कर्मचारियों की काउंसलिंग की जाएगी।

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मिशन की ओर से 28 मई 2017 से लेकर 7 अप्रेल 2018 के दौरान अस्पताल में परामर्श लेने आए मरीजों से उनके मोबाइल पर कॉल कर फीडबैक लिया गया। इस अवधि में कुल 2 लाख 74 हजार 696 मरीज अस्पताल में आए। इनसे पर्ची में मोबाइल नम्बर लिखवाया गया। इनमें से 28 फीसदी यानि 74 हजार 145 मरीजों ने पर्ची में मोबाइल नम्बर लिखे। इन मरीजों में से कुल 9 प्रतिशत यानि 6 हजार 465 मरीजों ने फीडबैक दिया। इनमे 38 फीसदी 2 हजार 458 मरीज अस्पताल की सेवाओं से बहुत ज्यादा संतुष्ट हुए। जबकि 35 फीसदी 2 हजार 250 मरीज सामान्य रूप से संतुष्ट हुए, जबकि 1757 मरीज तो अस्पताल की सेवाओं से बिल्कुल संतुष्ठ नजर नहीं आए है। इन 1757 असंतुष्ट मरीजों पर फोकस कर आगे सवाल पूछे गए तो इनमें से 45 फीसदी ने कहा कि वे डॉक्टरों के व्यवहार से खुश नहीं है, जबकि 38 फीसदी ने नर्सिंग व अन्य स्टाफ का व्यवहार असंतोषजनक बताया। कुछ ने गंदगी, जांच कार्य में ढिलाई जैसी समस्याएं बताई।

सरकार ने इसलिए लेना शुरू किया फीडबैक

सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीज वहां की सेवाओं से कितने संतुष्ठ है इसके बारे में जानने के लिए केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से मई 2017 में 'मेरा अस्पतालÓ प्रोजेक्ट शुरू किया। इस प्रोजेक्ट में अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या से लेकर, चिकित्सक का व्यवहार, सफाई व्यवस्था, इलाज की गुणवत्ता, लेबोरेट्री में जांच व्यवस्था, वार्डबॉय , टॉयलेट सुविधा, वार्डो में बेडशीट, दवा वितरण की स्थिति, परामर्श के लिए इंतजार सहित विभिन्न गतिविधियों का फीड बैंक वहां आने वाले मरीजों से लिया जाता है। इस योजना में इंटरेक्टिव वाइस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) के द्वारा मरीजों को अस्पताल में मिल रहे इलाज और अन्य तरह की सुविधाओं का फीडबैक लिया जा रहा है।

इस रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा
01. 11 माह में आए मरीजों की संख्या 2,75,696
02. सेवाओं से बहुत संतुष्ट 38 फीसदी
03. सेवाओं से सामान्य संतुष्ट 35 फीसदी
04. सेवाओं से असंतुष्ट 27 फीसदी
05. डॉक्टरों के व्यवहार से असंतुष्ट 45 फीसदी
06. सामान्य स्टाफ के व्यवहार से असंतोष 38 फीसदी
07. सफाई से असंतुष्ट 15 फीसदी
08. नर्सिंग स्टाफ से असंतुष्ट 22 फीसदी
09. लेब व एक्सरे स्टाफ से असंतुष्ट 11 फीसदी
10. फार्मासिस्ट से असंतुष्ट: 2 फीसदी
11. वार्ड बॉय से असंतुष्ट: 0
12: अन्य स्टाफ से असंतुष्ट 20 फीसदी
13. दवा सप्लाई से असंतुष्ट 34
सबका सहयोग जरूरी

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेरी अस्पताल प्रोजेक्ट की जो रिपोर्ट आई है उससे सभी चिकित्सकों व नर्सिंग स्टॉफ को स्वीकार करना चाहिए। जनता अस्पताल में संतुष्ट होकर जाए इसके लिए पूरे प्रयास किया जाए। व्यवस्थाओं में अगर खामियां है तो उन्हें भी दूर किया जाएगा। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है।
डॉ. एसपी आगीवाल, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, एमजीच