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Talk Show : शहर की गर्ल्स मानती है-सड़कों पर सुरक्षित हैं, फिर भी झेलनी पड़ती है शर्मिंदगी

शहर में यूं तो अब शांति है फिर भी शहर की सड़कों पर लड़कियां पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है

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शहर में यूं तो अब शांति है फिर भी शहर की सड़कों पर लड़कियां पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है

भीलवाड़ा।

शहर में यूं तो अब शांति है। फिर भी शहर की सड़कों पर लड़कियां पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। हालांकि कोई बड़ा खतरा भी नहीं है, फिर भी हमें किसी न किसी रूप में परेशानी झेलनी ही पड़ती है। यदि वे बाजार में जाएंगी तो उन्हें कभी बाइक से कट लगाएंगे तो कभी साइड नहीं देने का किस्सा होगा। रास्ते में कुछ न कुछ एेसा भी सुनने को मिल जाता है कि उससे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। साथ ही अब इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए खुद शहर की लड़कियों को आगे आकर जागरुक बनना पड़ेगा।

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कुछ इसी तरह के विचार शहर की गर्ल्स ने राजस्थान पत्रिका की ओर से विजन 2018 के तहत टॉक शो में दिए हैं। नए साल पर हर वर्ग के साथ राजस्थान पत्रिका का टॉक शो आयोजित हो रहा है। इस टॉक शो का संयोजन स्विफ्ट कॉलेज की निदेशक अर्पणा सामसुखा ने किया।

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क्रिएटीविटी सामने लाने के लिए प्रयास जरूरी
शहर की लड़कियों का मानना है कि आजकल पढ़ाई के साथ क्रिएटीविटी भी दिखाते हैं। इन सबके लिए शहर में एक एेसी जगह होनी चाहिए कि जिसकी जो रुचि हो वे वहां जाकर सीख सके। इसमें आर्टिस्ट के लिए भी अभी पर्याप्त स्थान नहीं है। एेसा होगा तो सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।

विजन 2018 के तहत दी प्रतिक्रिया
शहर में सार्वजनिक स्थानों व बाजार में लेडीज टॉयलेट पूरे हो। अभी कॉलेज रोड पर टॉयलेट तो है लेकिन उनके दरवाजे नहीं है।
बाजार में जो भी वाहन चलाते हैं, उनके हॉर्न की आवाज धीमी हो।
आजाद चौक सहित अन्य जगह पार्किंग के लिए पूरी जगह हो।
महिलाओं व लड़कियों के साथ छेड़छाड़ होने पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करें।
हर जगह जो लड़कों का लड़कियों के प्रति नकारात्मक रवैया रहता है उसे बदलें।
रोड पर लोग जानबुझकर फब्तियां कसते हैं, इन्हें रोके व लोग खुद भी भावनाओं का सम्मान करें।