
मुख्य सड़कों के किनारे नगर विकास न्यास और नगर परिषद जैसी संस्थाओं द्वारा लगाए गए पौधे ही सुरक्षित नहीं
भीलवाड़ा।
मानसून ऋतु शुरू होते ही भीलवाड़ा में विभिन्न संगठन पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दे रहे है। पौघे बचाने के संकल्प भी दिलाए जा रहे है। सरकार व प्रशासन भी जोर-शोर से ग्रीन एवं क्लीन भीलवाड़ा का नारा लगा पौधरोपण के प्रति संकल्पबद्धता जता रहे है। वहीं दूसरी और शहर में हाल ये है कि मुख्य सड़कों के किनाने किनारे नगर विकास न्यास और नगर परिषद जैसी संस्थाओं के द्वारा लगाए गए पौधे ही सुरक्षित नहीं है। इनके द्वारा पौधों की सुरक्षा के लिए ट्रीगॉर्ड भी लगाए गए हैं उसके बावजूद कई ट्रीगार्ड में से पौधे गायब हो चुके हैं। कई ट्री गॉर्ड क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
सड़क किनारे लगाए गए पोधो की सार संभाल नहीं करने से सरकारी तंत्र की पर्यावरण संरक्षण के दावों की पोल भी खुल रही है। शहर में उदयपुर रोड हो या अजमेर रोड, चित्तौड़ रोड हो या कोटा रोड सभी तरफ मय ट्रीगार्ड पौधे लगाए गए है। अधिकतर जगह हालात एक जैसे है और पौधों की सार संभाल पर ध्यान नही दिया जा रहा है। पौधों को समय पर पानी पिलाने की व्यवस्था भी नहीं कर पाने से कई पौधे लगाने के कुछ दिन बाद ही दम तोड़ गए। कई जगह क्षतिग्रस्त ट्रीगार्ड को नहीं बदलने से उनमें लगाए पौधे गाय, भैस, बकरी आदि जानवर खा गए।
पौधे ही गायब हो गए
पुर रोड पर पांसल चौराहे से जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय के पास आरओबी तक करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग पर सड़क चौड़ाई कार्य के बाद नगर विकास न्यास की ओर से सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा के लिए लोहे के ट्रीगार्ड लगाए गए। इस मार्ग पर कुछ ट्रीगार्ड में लगाए पौधे पेड़ बनकर पनप गए,लेकिन कई ट्रीगार्ड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके है। उनमें लगाए गए पौधे भी गायब होने से ट्रीगार्ड तो नजर आता है,लेकिन उनमें कोई पौधा नहीं दिखता है। कई जगह ट्रीगार्ड टूट जाने से उनमें लगाए पौधे भी संकट में आ गए।
Published on:
04 Sept 2017 01:48 pm
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