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परंपराओं के मूल भाव को जीवन में उतारें, अभिषेक, पूजा और भोजन के समय पूर्ण मौन रखें श्रावक

मुनि प्रणीत सागर ने आरके कॉलोनी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में कहां कि ज्ञान और बुद्धि के समन्वय से ही संभव है आत्मशुद्धि

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Implement the essence of traditions in life, Shravak should maintain complete silence during Abhishek, worship and meals.

परंपराओं के मूल भाव को जीवन में उतारें, अभिषेक, पूजा और भोजन के समय पूर्ण मौन रखें श्रावक

आरके कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन समाज की ओर से शनिवार सुबह आयोजित धर्मसभा आध्यात्मिक उत्साह और श्रद्धा से परिपूर्ण रही। सभा में मुनि प्रणीत सागर ससंघ की उपस्थिति ने वातावरण को धर्ममय बना दिया। समाज के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने महाराज से भीलवाड़ा में ग्रीष्मकालीन वाचना आयोजित करने का निवेदन किया।

इस अवसर पर समाज की ओर से आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में ग्रीष्मकालीन वाचना सम्पन्न कराने के लिए विधिवत श्रीफल अर्पित कर आमंत्रण दिया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष नरेश गोधा, सचिव अजय बाकलीवाल, राजकुमार सेठी, खेमराज कोठारी, चैनसुख शाह सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। सभी ने एक स्वर में महाराज से धर्म लाभ प्रदान करने की प्रार्थना की।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रणीत सागर ने कहा कि आत्मिक विशुद्धि प्राप्त करने के लिए मन, वचन और काया की शुद्धि अत्यंत आवश्यक है। हम परंपराओं का पालन तो कर रहे हैं, लेकिन उनके मूल भाव को समझने और जीवन में उतारने का प्रयास कम कर रहे हैं। गुरु के सानिध्य में बैठकर दैनिक जीवन में शुद्धता के सिद्धांतों को सीखना और अपनाना ही सच्ची साधना है।

महाराज ने ज्ञान दान को सबसे श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि गुरु पूरी निष्ठा और सामर्थ्य के साथ ज्ञान प्रदान करते हैं, लेकिन जब तक श्रावक अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करेगा, तब तक वह केवल सुनने तक सीमित रहेगा। ज्ञान और बुद्धि का समन्वय ही वास्तविक आत्मशुद्धि की शुरुआत है। वचन शुद्धि पर जोर देते हुए कहा कि कम बोलना, सोच-समझकर बोलना, निरर्थक वचन से बचना और परनिंदा का त्याग करना आवश्यक है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को निर्देश दिया कि भगवान के अभिषेक और पूजा के दौरान पूर्ण मौन रखें। इससे साधना की एकाग्रता बनी रहे। इसके साथ ही दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों जैसे स्नान, भोजन और अन्य क्रियाओं के समय भी मौन का अभ्यास आत्मसंयम को बढ़ाता है। महाराज ने सभी को एक संकल्प के साथ धार्मिक क्रियाए करने का आव्हान किया। गुरू की भक्ति के साथ भगवान की भक्ति भी करें। मुनि प्रणीत सागर ने आरके कॉलोनी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में कहां कि ज्ञान और बुद्धि के समन्वय से ही संभव है आत्मशुद्धि। इसके बिना कुछ भी नही है। धर्मसभा के अंत में श्रद्धालुओं ने महाराज के उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।