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शाला दर्पण पर बच्चों की हाजिरी में लापरवाही, 6 ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

भीलवाड़ा जिला कलक्टर और माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर के के आदेशों की अनदेखी, 3 दिन में व्यक्तिगत रूप से मांगा जवाब

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Negligence in children's attendance on Shala Darpan, show cause notice to 6 block education officers

शाला दर्पण पर बच्चों की हाजिरी में लापरवाही, 6 ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के तहत शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में घोर लापरवाही बरतना जिले के 6 मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ) को भारी पड़ गया है। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला कलक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद काम में ढिलाई बरतने पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (समग्र शिक्षा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दें।

इन ब्लॉक्स के अधिकारियों पर गिरी गाज

सीडीईओ अरुणा गारू ने जिले के सुवाणा, कोटड़ी, शाहपुरा, आसीन्द, जहाजपुर और सहाड़ा सीबीईओ को यह नोटिस थमाया गया है। मॉनिटरिंग में सामने आया कि इन ब्लॉक्स में विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रगति बेहद कम है।

कलक्टर के निर्देशों की भी उड़ी धज्जियां

नोटिस में इस बात का कड़ा संज्ञान लिया गया है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 12 अप्रेल और भीलवाड़ा जिला कलक्टर द्वारा 17 अप्रेल को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए थे। कलक्टर ने सभी सीबीईओ को प्रतिदिन शत-प्रतिशत हाजिरी शाला दर्पण पर दर्ज करवाने की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद इन 6 ब्लॉक के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विभाग ने नोटिस में 3 दिवस में जवाब तलब किया है।

ऑनलाइन हाजिरी: 80-90 प्रतिशत तक सफल

स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों की शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी 80 से 90 प्रतिशत तक नियमित रूप से दर्ज की जा रही है। कुछ जगह नेटवर्क और ऐप के सर्वर डाउन के कारण लक्ष्य हासिल करने में परेशानी आती है। अध्यापकों को अपने मोबाइल में शिक्षक ऐप डाउनलोड करना होता है, जिसे शाला दर्पण पोर्टल से मैप किया जाता है। ऐप में डिफ़ॉल्ट रूप से कक्षा के सभी बच्चे उपस्थित दिखाई देते हैं। शिक्षक को केवल अनुपस्थित बच्चों को मार्क करके सबमिट करना होता है। इसमें बहुत कम समय लगता है।

पीईईओ पर बढ़ रहा मानसिक दबाव

अधीनस्थ स्कूलों की मॉनिटरिंग कर रहे पीईईओ ने इस व्यवस्था में काम के अत्यधिक बोझ की शिकायत की है। एक पीईईओ ने बताया कि उनके अधीन 5-6 स्कूल आते हैं। उन्हें हर सुबह सबसे पहले यह जांचना पड़ता है कि किन स्कूलों ने हाजिरी भरी है और किन्होंने नहीं। उपस्थिति दर्ज न करने वाले स्कूलों को फोन करके याद दिलाना पड़ता है। पीईईओ का कहना है कि अपने स्कूल की हाजिरी के लिए सीधे तौर पर उस स्कूल के संस्था प्रधान को ही जिम्मेदार माना जाना चाहिए।