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5 लेक्चरर को बिना काम डेपुटेशन पर चित्तौड़ लगाया, न कक्षाएं ली और न कोई काम बताया, सात दिन में सिर्फ दस्तखत कर लौटे

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Professors without assigning work in bhilwara

Professors without assigning work in bhilwara

भीलवाड़ा।

कॉलेज निदेशालय में सरकारी धन की बर्बादी का नमूना देखिए। यहां प्रोफेसरों को बिना काम डेपुटेशन पर लगाया जा रहा है। एेसा ही एक बड़ा मामला भीलवाड़ा का सामने आया है। यहां से पांच प्रोफेसरों को महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज चित्तौडग़ढ़ में सात दिन के लिए डेपुटेशन पर लगाया। इन प्रोफेसरों ने वहां ज्वॉइन भी किया। अभी कॉलेजों में कक्षाएं भी शुरू नहीं हुई है। एेसे में ये पांचों वहां सात दिन के लिए गए और केवल हस्ताक्षर किए।

इन पांचों को वहां क्या काम करना था यह भी आदेश में उल्लेखित नहीं था। एेसे में इन्होंने वहां हस्ताक्षर किए और बिना काम किए वापस मूल पद के लिए रिलीव हो गए। प्रवेश प्रक्रिया चल रही थी इतने में सात दिन पूरे हो गए और ये सभी वापस भीलवाड़ा आ गए। सवाल यह है कि इन पांचों को चित्तौडग़ढ़ क्यों भेजा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बस निदेशालय का आदेश था इसलिए वहां चले गए। कॉलेज शिक्षा में गड़बड़ी का यह इकलौता नमूना नहीं है। इसमें व्याख्याताओं के मनमर्जी के डेपुटेशन किए जा रहे हैं।

भीलवाड़ा से इन्हें भेजा

एमएलवी ब्वॉयज कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर केएल शर्मा, सुमन पलसानिया, शैलजा उपमन्यु व शैलेंद्र जैन को चित्तौड़ भेजा गया। सेठ मुरलीधर मानसिंहका कन्या महाविद्यालय से भी रंजिता गर्ग को चित्तौडग़ढ़ में सात दिन डेपुटेशन पर लगाया गया। अन्य कॉलेजों से भी स्टाफ लगाया। इन्हें केवल सात दिन बिना काम क्यों लगाया? यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

इधर, 30 दिन का डेपुटेशन

एमएलवी ब्वॉयज कॉलेज से अभी पांच लेक्चरर को 30 दिन के डेपुटेशन पर लगाया। इसमें दो को बनेड़ा, दो को मांडलगढ़ व एक को बिजौलियां लगाया है। सरकार ने अभी 31 नए कॉलेज खोल दिए लेकिन इनमें न स्टाफ है और न संसाधन। एेसे में कागजों पर कॉलेज चल रहे हैं।

अनुदान की लग रही कहानी

कॉलेज स्टाफ के डेपुटेशन आदेश में कारण का जिक्र नहीं है। माना जा रहा है कि रूसा से अनुदान प्राप्त करने के लिए एकबारगी यह प्रक्रिया अपनाई गई। 70 फीसदी पद भरे होने की रूसा की शर्त पूरी हो जाएं। अनुदान को प्राप्त करने की मंशा से आयुक्तालय ने यह गली निकाल दी।

टीए-डीए का पड़ेगा बोझ

भीलवाड़ा से चित्तौडग़ढ़ पीजी कॉलेज में लगाए इन लेक्चररों ने वहां विशेष काम नहीं किया। इसके बावजूद सरकार को टीए-डीए चुकाना पड़ेगा। एेसे मनमर्जी के आदेशों से सरकारी कोष को नुकसान पहुंच रहा है। कई लेक्चरर को केवल खानापूर्ति करने के लिए डेपुटेशन पर लगा रहे हैं।

हमें चित्तौडग़ढ़ के पीजी कॉलेज में सात दिन डेपुटेशन पर लगाया। हमने ज्वॉइन किया लेकिन कक्षाएं शुरू नहीं हुई थी। कोई विशेष काम नहीं था इसलिए प्रवेश प्रक्रिया में ही सहयोग किया। सात दिन पूरे हुए तो वापस भीलवाड़ा आ गए। भीलवाड़ा से पांच जनों को भेजा था।

केएल शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, एमएलवी कॉलेज