
Profitable deal: Trend towards strawberries is increasing in Bhilwara.....now gardens will be set up in 10 hectares
आमतौर पर ठंडे प्रदेश कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, शिमला में होने वाली स्ट्राॅबेरी की खेती को लेकर अब भीलवाड़ा भी पीछे नहीं है। जिले के बीगोद, मांडलगढ़ तथा बिजौलिया क्षेत्र के अधिकांश किसान खेती कर कमाई कर रहे है। यहां के किसानों का स्ट्राॅबेरी की ओर बढ़ता रूझान नवाचार की इबारत लिख रहा है। इसके चलते कृषि आयुक्तालय ने किसानों को प्रोत्साहन देते हुए भीलवाड़ा उद्यान विभाग को इस साल दस हैक्टेयर में स्ट्रॉबेरी लगवाने का लक्ष्य दिया है। किसान भी स्ट्राॅबेरी खेती से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे है।
ऐसे होती है खेती
स्ट्रॉबेरी के पौध को ड्रिप व मल्चिंग पर उगाया जाता है। इसकी रोपाई सितंबर-अक्टूबर में होती है। यह दिसम्बर से मार्च के अंत तक फल देता है। एक हैक्टेयर में स्ट्रॉबेरी लगाने से कम से कम 2 से 3 लाख का मुनाफा किसानों को हो रहा है। इसका पौधा 10 से 15 रुपए के बीच पड़ता है। इसे तैयार करने का काम गंगरार के किसान कर रहा है। करीब 50 से 70 बीघा में हर साल बड़ी संख्या में पौधे तैयार कर भीलवाड़ा व चित्तौड़गढ़ में बेचा जाता है। जिले में तैयार फल दिल्ली मंडी में भेजा जाता है। जहां 2 सौ रुपए किलो का भाव मिलता है।
80 हजार तक का अनुदान
सरकार ने स्ट्रोबेरी की बगीचे बढ़ाने व किसानों को प्रोत्साहित के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है। एक हैक्टेयर में बगीचे लगाने पर उद्यान विभाग 80 हजार तक का अनुदान देगा। इससे किसानों का रूझान बढ़ा है। अभी जिले में करीब 20 से 25 किसान स्ट्रोबेरी लगा रहे है। दिसम्बर से फरवरी तक स्ट्रॉबेरी की क्यारियां प्लास्टिक शीट से ढंकने से फल एक माह पहले तैयार हो जाते हैं और उपज भी बढ़ जाती है।
कम खर्च में अधिक मुनाफा
एक पौधे पर खर्च करीब 15 रुपए आता है। इसे लगाने व अन्य खर्च 10 रुपए प्रति पौधा और लगता है। तीन माह में फसल तैयार होती है। एक हैक्टेयर में दो लाख का खर्चा करने पर 4 से 5 लाख रुपए की आय आसानी से हो जाती है। सरकार ने 10 हैक्टेयर का लक्ष्य दिया है।
- शंकरसिंह राठौड़, उप निदेशक उद्यान विभाग भीलवाड़ा
Published on:
29 Jun 2025 09:46 am
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
