
पंकज श्रीवास्तव
भीलवाड़ा.Rajasthan Assembly Election 2023: सुवाना की ओर से भीलवाड़ा में प्रवेश करते ही बोर्ड नजर आते हैं, वस्त्रनगरी में आपका स्वागत है। यहां तैयार कपड़े की क्वालिटी के लिए देश-विदेश में छा चुके भीलवाड़ा में कुछ बड़ी मिलों के पलायन की बात अचरज में डाल देती है। हालांकि चंद मिलें ही मध्यप्रदेश गई हैं, लेकिन चंद सुविधाएं जुट जाएं तो इससे चार गुना ज्यादा निवेश यहां लौट सकता है। ये कहना है भीलवाड़ा टैक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अतुल शर्मा का। इनका कहना है कि मध्यप्रदेश में अतिरिक्त सुविधाएं मिलने से यहां की करीब पांच बड़ी मिलें पलायन कर गई। केंद्र की योजना से सिर्फ बड़ी मिलों को ही लाभ मिल पाता है, जबकि छोटी मिलों के लिए कोई योजनाएं नहीं हैं। मिलों को पानी देने के लिए जल बोर्ड की घोषणा हुई, लेकिन पूरी नहीं हुई। वहीं, बिजली की दरें यहां मिलों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं, जबकि भीलवाड़ा प्रतिमाह नौ से 10 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन कर रहा है। यहां स्थापित मिलें यहां की लाइफलाइन हैं, इनके लिए जनप्रतिनिधियों को आवाज उठानी चाहिए।
रेलवे स्टेशन के पास पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू मिले। वे बाले, शहर में एक ही रेलवे ओवर ब्रिज है। दूसरे ब्रिज की सिर्फ घोषणाएं होती रही। रोज रेलवे क्रॉसिंग पर कम से कम 35 बार जाम लगता है। कोठारी नदी पर अतिक्रमण हटाकर रिवर फ्रंट बनना चाहिए, वहीं शहर की शान गांधीसागर, नेहरू तलई व मानसरोवर झीलों को सीवरेज से बचाने की सख्त जरूरत है।
पांसल गांव चौराहे पर मिले इंजीनियर अंकु श सारस्वत बोले, शहर में पार्किं ग व्यवस्था पूरी तरह शून्य है। आजाद चौक में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की बातें भी हुईं, पर कागजों में ही रह गईं। शिक्षक आशीष उपाध्याय का कहना था कि कुछ साल पहले तक यहां ट्रेन से पानी आता था। चंबल प्रोजेक्ट से राहत तो मिली, पर अधूरी। पेयजल सप्लाई लाइनें जर्जर हैं। उसमें सीवरेज का पानी मिल रहा है। 55 से 60 निजी कॉलोनियों अभी भी फ्लोराइडयुक्त पानी पी रही हैं। वकील सुयश शुक्ला सडक़ों के हालाता से नाराज हैं।
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भीलवाड़ा के साये में विधानसभा क्षेत्र मांडल के हाल भी कुछ अलग नहीं हैं। मांडल में बन रहे स्पोट्र्स स्टेडियम के पास मिले सेवानिवृत्त प्रिंसिपल बनवारी लाल बोले, मांडल की धरोहर यहां के तालाब को पर्यटन के लिए विकसित किया जाना चाहिए। आस-पास जो भी उद्योग धंधे आएं उनमें मांडल के युवाओं को काम मिलना चाहिए, क्योंकि यहां रोजगार की समस्या है। अभी युवा भीलवाड़ा और गुजरात पलायन करने को मजबूर हैं। मुख्य सडक़ के पास राजेंद्रकुमार मिले, जिन्होंने बताया कि ये जो डिवाइडर बन रहे हैं, इनमें बहुत गैप छोड़ा जा रहा है, जिससे दुर्घटनाएं होंगीं। ग्राम विकास अधिकारी रह चुके भगवतीलाल टेलर ने बताया कि जब यहां मीटर गेज लाइन थी तो ट्रेनें रुकती थीं अब ब्रॉड गेज है तो नहीं रुक रहीं। कुछ ट्रेनों का यहां स्टॉपेज होना चाहिए। फोटोकॉपी व्यवसायी अमृतलाल ने बताया कि यहां रोडवेज की बसें बाहर बाइपास से निकल जाती हैं। मोबाइल दुकान के मालिक भैरूलाल कहते हैं कि यहां चांद का बाग बेहाल है, उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। नौकरी पेशा नरेंद्र जींगण कहते हैं कि यहां रोजगार नहीं है, युवा नशे की लत में पड़ रहे हैं। दिन में 20 से 25 बार बिजली जाती है।
Published on:
15 Jul 2023 08:45 am
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