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Rajasthan Patrika Foundation Day 2024: सरकार ध्यान दें तो, 50 हजार करोड़ का हो सकता टर्नओवर

विश्व के टेक्सटाइल उद्योग ने इस तरह के फायबर को उपयोगी माना है

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भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्यमी नई सोच के साथ नए प्रयोग करने में देश में अग्रणी है। पानी की अनुपलब्धता, महंगी बिजली व अन्य समस्याओं के बावजूद यहां की उद्यमशीलता ने टेक्सटाइल उद्योग को विश्व में पहचान दिलवाई है।

देश के कई टेक्सटाइल केन्द्र जब भीलवाड़ा से कबाड़ के रूप में बेचे सीमको व रुटीबी लूम लगा रहे थे, तब यहां के उद्यमियों ने सल्जर लूम को भी पुरानी टेक्नोलॉजी मानकर एयरजेट लूम प्रणाली में प्रवेश किया। एयरजेट मशीन निर्माताओं ने इस लूम को हल्के वजन की सर्टिंग व साड़ी उत्पादन के लिए बनाया। सूरत में एयरजेट पर साडिय़ां बनती है। जबकि भीलवाड़ा में प्रति मीटर 400 ग्राम से अधिक वजन के डेनिम बना रहे हैं। वर्तमान में अहमदाबाद के बाद भीलवाड़ा देश का दूसरा बड़ा डेनिम उत्पादक केन्द्र बन गया। साधारण सूङ्क्षटग के साथ कई तरह की असाधारण सूङ्क्षटग जैसे आयल ड्रिङ्क्षलग एवं ऑफ सॉर ऑयल प्लेटफॉर्म के लिए उपयुक्त, भारतीय सेना के वाटर प्रुफ फैब्रिक्स, वेस्ट एवं फायबर वेस्ट से फैब्रिक्स, एन्टीबैक्टीरियल एवं आयल रिप्लेन्ट, अग्निरोधक फैब्रिक्स, सिल्क फैब्रिक्स बना रहे हैं। यहां के औद्योगिक घरानों ने वेस्ट प्लास्टिक बोतल से पुन: फाइबर बनाने के प्लांट लगाए हैं। तीन इकाई आरएसड्ब्ल्यूएम, कंचन, एमिनेन्ट ने इसके प्लांट लगा रखे हैं। प्लास्टिक बोतल को रिसाइकल कर पॉलिएस्टर फाइबर बना रहे हैं। यह पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान है। विश्व के टेक्सटाइल उद्योग ने इस तरह के फायबर को उपयोगी माना है। इससे निर्मित यार्न का कई देशों में निर्यात हो रहा है। उद्योग को वांछित मात्रा में पानी मुहैया कराए, विद्युत दरें तर्कसंगत होने के साथ सौर ऊर्जा पर पिछले वर्षो में लगाए तरह-तरह के अवरोध समाप्त हो जाए तो अगले पांच वर्ष में भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग का टर्नओवर दोगुना होकर पचास हजार करोड़ प्रतिवर्ष तक पहुंच सकता है।
आरके जैन, महासचिव,मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री