
बैंक में लगातार हो रहे घोटालों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की सभी बैंकों को एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और एलओसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) जारी नहीं करने के लिए आदेश जारी कर रखा है
भीलवाड़ा।
बैंक में लगातार हो रहे घोटालों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की सभी बैंकों को एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और एलओसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) जारी नहीं करने के लिए आदेश जारी कर रखा है। बैंकों की ओर से जारी किए जाने वाले एलओयू और एलओसी में रोक लगने से शहर के टेक्सटाइल उद्यमियों के लिए समस्याओं खड़ी हो गई है। प्रमुख तौर से विदेश से आयात होने वाली मशीनों को लेकर समस्या आ रही है। उद्यमी फिलहाल विदेश से मशीन आयात नहीं कर पा रहे हैं। एलओयू और एलओसी पर लगी रोक के कारण इन उद्यमियों को विदेशी मुद्रा में लोन नहीं मिल पा रहा है। विदेशी मुद्रा और भारतीय करेंसी में मिलने वाली लोन के पीछे का सबसे बड़ा कारण रेट ऑफ इंट्रेस्ट है।
केपिटल गुड्स और कच्चे माल के लिए विदेशी मुद्रा में लिए जाने वाले ऋण का वार्षिक ब्याज दर 2.50 से 3.50 प्रतिशत होता है, जबकि भारतीय करेंसी में इसका वार्षिक ब्याज दर 9.50 से 10.50 प्रतिशत होता है। यानी विदेशी मुद्रा में ली जाने वाली ऋण और भारतीय मुद्रा में ली जाने वाली ऋण में 6 प्रतिशत से अधिक के ब्याज दर का एक बड़ा अंतर होता है। इतना ही नहीं बायर्स क्रेडिट ऋण की समय सीमा अधिक से अधिक तीन वर्ष तक होती है।
थोड़ा भी पैसा दिया तो मशीनें लेनी पड़ेंगी
जिन उद्यमियों को मार्च से पूर्व एलओयू और एलओसी लेटर मिल चुके हैं। उन्होंने इन मशीनों के लिए 5 से 10 प्रतिशत भुगतान भी कर दिया है, उन्हें मशीनें तो लेनी पड़ेगी। उद्यमियों को एक ओर तो रिन्यू डेट तक लोन की अदायगी भी करनी होगी। मशीन आयात करने वाले 99 प्रतिशत ऋण विदेशी मुद्रा में लेते हैं। जिन उद्यमियों ने ऋण ले रखा है उन्हें फिलहाल ऋण अदा करने की चिंता में है।
विदेशों में अटकी हैं उद्यमियों की मशीनें
उद्यमियों का कहना है कि एलओयू नहीं मिल पाने के कारण मशीनें विदेशों में ही अटक गई हैं। इस पर राज्य व केन्द्र सरकार को गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। बैंक घोटाले के बाद विदेशी मुद्रा में सीघा ऋण लेने वालों को तत्काल भुगतान करना है। इसके कारण उद्यमियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Published on:
21 Apr 2018 03:03 pm
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