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महंगाई की मार से राहत और रोजगार की बहार की आस….शिक्षा-स्वास्थ्य में बड़े सुधारों की दरकार

- केंद्रीय बजट 2026 से है कई उम्मीदे

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Relief from the burden of inflation and the hope of abundant employment... major reforms are needed in education and healthcare.

Relief from the burden of inflation and the hope of abundant employment... major reforms are needed in education and healthcare.

आम बजट की तारीख नजदीक आने के साथ आमजन की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे पर टिकी हैं। आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक, हर कोई इस उम्मीद में है कि 'विकसित भारत' की ओर बढ़ते कदमों में उनकी जेब का भी ख्याल रखा जाएगा। पत्रिका के विशेष अभियान 'देश बोले: इस बार बजट से क्या चाहता है भारत?' के तहत जनता ने अपनी राय स्पष्ट कर दी है।

महंगाई से कैसे मिले राहत

आमजन के लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने बजट बिगाड़ दिया है। जनता चाहती है कि मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जाए। रोजमर्रा की जरूरी चीजों को न्यूनतम टैक्स स्लैब में रखा जाए। खाद्य और उर्वरक सब्सिडी को सीधे किसानों तक पहुंचाए। जमाखोरी और कालाबाज़ारी पर नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाए। पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स संतुलन हो। इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी, बायो-फ्यूल और सोलर एनर्जी पर सब्सिडी मिले। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत कम करना। टैक्स और जीएसटी में सुधार। आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स राहत।

शिक्षा: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता

शिक्षा में केवल बजट आवंटन बढ़ाना काफी नहीं, जमीनी सुधार जरूरी हैं। सरकारी स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाओं और एआई शिक्षा का विस्तार होना चाहिए। एजुकेशन लोन पर ब्याज दरों में कटौती और स्कॉलरशिप के दायरे में बढ़ोतरी। शिक्षा बजट को 6 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखें। ताकि आधारभूत और उच्च शिक्षा दोनों ही मजबूत हों। हर सरकारी स्कूल में शौचालय, पीने का पानी, पुस्तकालय, कम्प्यूटर/डिजिटल लैब और प्रयोगशाला अनिवार्य करें। स्नातक पाठ्यक्रम में उद्योग-सम्बंधी प्रशिक्षण और इंटर्नशिप अनिवार्य करें।

चिकित्सा: हर गांव तक पहुंचे इलाज

कोरोना के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की गति बढ़ी है, लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक मशीनों से लैस किया जाए। जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क में और कटौती हो। 'आयुष्मान भारत' के तहत कवर होने वाली बीमारियों और राशि की सीमा बढ़ाई जाए। स्वास्थ्य बजट को जीडीपी का 3 प्रतिशत से ऊपर लाने का उद्देश्य निर्धारित करें। इससे बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं, प्रशिक्षण और आधुनिक चिकित्सा उपकरण का विस्तार सुनिश्चित होगा। डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती व प्रशिक्षण के लिए विशेष बजट दें। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन नेटवर्क को बढ़ावा दें। इससे दूरदराज के इलाकों में भी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हों।

महंगाई का कारण मालभाड़े में वृद्धि

महंगाई एक प्रमुख कारण मालभाड़ा में भारी बढ़ोतरी है। यह लागत डीजल के मूल्यों में आई तेजी से हुई। देश के कच्चे तेल की लागत 60 डॉलर से भी कम है। इस अनुसार डीजल या पेट्रोल के दाम कम होने चाहिए। पेट्रोलियम को 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में लाना चाहिए।

- महेन्द्र सेठी, पूर्व ट्रस्टी आरके जैन मंदिर भीलवाड़ा

हर सुविधा मिले

सरकारी स्कूल में शौचालय, पीने का पानी, पुस्तकालय, कम्प्यूटर/डिजिटल लैब और प्रयोगशाला अनिवार्य करें। ई-लर्निंग संसाधन और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए बजट का प्रावधान बढ़ाए।

- वीरेन्द्र शर्मा, शिक्षक

बजट से स्वास्थ्य क्षेत्र को भारी उम्मीदें हैं। आयुष्मान भारत का दायरा बढ़ाकर बुजुर्गों को जोड़ना और बीमा कवर बढ़ाना चाहिए। कैंसर का सस्ता इलाज, मेडिकल सीटों में वृद्धि और स्वास्थ्य बजट को जीडीपी के 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने पर जोर होना चाहिए।

- डॉ . फरियाद मोहम्मद, चिकित्सा विशेषज्ञ