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शाहपुरा का रण : परखेंगे सियासत की चाशनी, फिर खाएंगे ढाई इंच के गुलाब जामुन

नए जिले शाहपुरा के चुनावी पिच पर त्रिकोणीय मुकाबले से रोमांच मतदाता बोले, विजन-2030 की उम्मीद के साथ बनाएंगे शाहपुरा का भविष्य
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शाहपुरा का रण : परखेंगे सियासत की चाशनी, फिर खाएंगे ढाई इंच के गुलाब जामुन

शाहपुरा का रण : परखेंगे सियासत की चाशनी, फिर खाएंगे ढाई इंच के गुलाब जामुन

चुनावी साल में नए जिले का ताज पहनने के बाद शाहपुरा में विधानसभा चुनाव ढाई इंच गुलाब जामुन जैसा दिखाई दे रहा है। जिस तरह चाशनी से भरपूर पूरा गुलाब जामुन एक साथ नहीं खा सकते। उसी तरह शाहपुरा में सियासत की चासनी को भी एक नजर से नहीं आंक सकते।

पिछले चुनावों में भी यहां समीकरण बदलते रहे हैं। बीते दो चुनाव की पारी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने भाजपा से खेली और इस बार तीसरी पारी बगावत के झंडे के साथ निर्दलीय के रूप में खेल रहे हैं। भाजपा ने मेघवाल का टिकट काटकर यहां से नए चेहरे के रूप में लालाराम बैरवा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने नरेन्द्र रैगर को मैदान में उतारा है।

शाहपुरा की जनता का मानस है कि पिछले चुनावों की तरह इस चुनाव में भी ढाई इंच का गुलाब जामुन चाशनी का तार देखकर ही खाएंगे। यानी विजन-2030 तक शाहपुरा को कैसा देखना है, उसे देखकर शाहपुरा की तकदीर लिखेंगे। यहां विकास की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए मतदाताओं ने उम्मीदों की झड़ी लगा रखी है। औद्योगिक विकास, परिवहन सेवाओं के विस्तार, रोजगार की संभावनाओं के मुद्दों पर नजर है। शाहपुरा के सपनों को कौन पूरा कर सकेगा, ऐसे प्रत्याशी को विधानसभा भेजने की तैयारी है।

हेमराज शर्मा का कहना रहा कि शाहपुरा जिले की सबसे बड़ी समस्या रोजगार का अभाव है। बड़े उद्योग धंधे नहीं होने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों में जाना पड़ रहा है। ऐसे में बेटा-बेटी का ब्याव समय पर नहीं हो रहा हैं। शाहपुरा के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपखंड बनेड़ा है। बनेड़ा निवासी कैलाशचन्द्र छीपा ने कहा कि यहां भोर होते ही युवा रोजगार की तलाश में गांव छोड़ देते हैं। भीलवाड़ा और अजमेर तक रोजगार तलाशते हैं। रेल सेवा यहां की महत्ती जरूरत मानी जा रही है। यहां बड़े उद्योग-धंधे स्थापित होने चाहिए।

क्षेत्र के तीन बड़े मुद्दे

बड़े उद्योगों के स्थापना होनी चाहिए। ताकि रोजगार के लिए युवाओं का अन्यत्र पलायन नहीं हो।-रेल, सड़क परिवहन की सुविधाएं बढ़े, जिससे विकास को नई दिशा मिलेगी।

-भीलवाड़ा से अलग होकर नया जिला बनने से उदयपुर, कोटा और जोधपुर की तर्ज पर यहां भी विकास होना चाहिए।

प्रत्याशियों के वादे

-नया जिला बनने से विकास को पंख लगाए जाएंगे।

- उद्योग-धंधे स्थापित कराएंगे, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार सुलभ हो।

-शाहपुरा को रेलवे सेवा व अन्य परिवहन सुविधाओं से जोड़कर सुगम कनेक्टिविटी स्थापित करेंगे।

अब तक कांग्रेस रही भारी

आजादी के बाद से अब तक हुए 15 बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भारी रही है। चुनाव में 9 बार कांग्रेस, 5 बार भाजपा और एक बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज कराई। पिछले दस साल के दो विधानसभा चुनाव में भाजपा क्षेत्र में परचम फहरा रही है।

शाहपुरा विस : फैक्ट

कूल बूथ- 277

कुल मतदाता- 254654

पुरुष- 128015

महिला- 124634

चुनाव मैदान में प्रत्याशी- 8

Story Content - आकाश माथुर

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